जेल भीतर भी सजा करवा चौथ का रंग, मथुरा की 36 महिला बंदियों ने रखा व्रत, 13 के पति भी कैद में

Karva Chauth: मथुरा के जिला जेल में करवा चौथ कुछ अलग अंदाज में मनाया गया। महिला कैदियों ने भी जेल में रहकर व्रत किया। सीमित आजादी के बीच भी प्रेम और आस्था की भावना ने जेल की दीवारों को रंगीन बना दिया।
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मथुरा जेल में 36 महिला बंदियों ने रखा करवा चौथ का व्रत, फोटो- IANS
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Karva Chauth in Mathura Jail: जिला कारागार मथुरा में इस बार कुल 36 महिला बंदियों ने अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखा, जिनमें से 13 महिलाओं के पति भी इसी जेल में निरुद्ध हैं। प्रशासन ने इन दंपतियों के लिए विशेष मुलाकात की व्यवस्था की, जिससे दोनों ने त्योहार की शाम एक साथ बिताई।

इस अनूठे आयोजन की तैयारी दो दिन पहले से ही शुरू कर दी गई थी। जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग के निर्देश पर खजानी वेलफेयर एसोसिएशन के सहयोग से व्रती महिलाओं के लिए पूजन सामग्री, साड़ी, मिट्टी के करवे और श्रृंगार के सभी पारंपरिक सामान उपलब्ध कराए गए। जेल परिसर को सादगी के साथ सजाया गया था। सभी महिलाओं ने परंपरागत विधि-विधान से पूजन किया और चांद के दर्शन के बाद अपने व्रत को पूर्ण किया। जेल प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि व्रती महिलाओं को मैनुअल के अनुसार व्रत के दौरान उपयुक्त डाइट दी जाए।

मेहंदी प्रतियोगिता से और बढ़ी रौनक

करवा चौथ की शाम को महिला बंदियों के बीच मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में विजेता महिलाओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के दौरान खजानी वेलफेयर एसोसिएशन की टीम ने सभी व्रती महिलाओं को पूजन सामग्री और उपहार वितरित किए।

जेल प्रशासन का मानवीय चेहरा

जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि मथुरा जिला कारागार में कुल 84 महिलाएं निरुद्ध हैं, जिनमें से 30 से अधिक ने करवा चौथ का व्रत रखा। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास है कि जेल में बंद महिलाएं भी अपने धार्मिक और सामाजिक पर्वों को सम्मान के साथ मना सकें। ऐसे आयोजन उनके मनोबल को बढ़ाते हैं और समाज की मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा देते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि जिन महिलाओं के पति जेल में ही हैं, उनके लिए यह क्षण भावनात्मक रूप से खास रहा। प्रशासन ने उनके लिए गोपनीय और सुरक्षित स्थान पर मिलने की विशेष व्यवस्था की।

भावनाओं से भर गया जेल

त्योहार की शाम जब चांद निकलने, तो जेल परिसर में भी वही दृश्य होगा, जो बाहर की दुनिया में होता है- महिलाएं चलनी से चांद को निहारतीं, फिर अपने पतियों की लंबी उम्र की दुआ मांगतीं। सीमित दायरे में भी श्रद्धा, आस्था और प्रेम उस माहौल को पूर्णता देगी।

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