आज है करवा चौथ, जानिए चंद्र उदय का समय और सही पूजाविधि

Karwa Chauth: आज सुहागन महिलाओं ने अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना के लिए करवा चौथ का व्रत रखी हैं। सुहागिनें रात को चंद्रदेव का दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी।
आज है करवा चौथ, जानिए चंद्र उदय का समय और सही पूजाविधि
जानिए क्या रहने वाला करवा चौथ शुभ मुहूर्त (सौ.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Karwa Chauth Moon Rise Time: आज पूरे देशभर में करवा चौथ का पावन पर्व मनाया जा रहा है। करवा चौथ विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। जो हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है।

आपको बता दें, करवा चौथ को कर्क चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा चौथ का यह व्रत महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र और उनकी कामना के लिए रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार, करवा चौथ के दिन विधिवत पूजा के बाद महिलाएं रात को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करती हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं करवा चौथ शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी सारी बातें-

जानिए क्या रहने वाला करवा चौथ शुभ मुहूर्त (karva chauth puja ka shubh muhurt)

पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस बार चतुर्थी तिथि की शुरुआत 9 अक्टूबर की रात 10 बजकर 54 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 10 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 38 मिनट पर होगा।

वहीं, करवाचौथ के लिए एक पूजन मुहूर्त मिलेगा, जो शाम 5 बजकर 57 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। जिसकी अवधि 1 घंटे 14 मिनट की रहेगी।

इसके अलावा, करवा चौथ के दिन उपवास रखने का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में व्रती महिलाएं माता करवा की पूजा, कथा सुनना जैसे सभी कार्य किए जा सकते हैं।

करवा चौथ चंद्रोदय का समय

करवाचौथ के दिन चंद्रोदय का समय शाम 8 बजकर 14 मिनट बताया जा रहा है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में चंद्रोदय रात 8 बजकर 13 मिनट पर हो सकता है।

करवा चौथ की पूजा कैसे करें

  • पूजा के लिए दीवार पर करवा चौथ पूजा कैलेण्डर लगाएं या चौथ माता की छवि बनाएं।
  • सबसे पहले कलश की स्थापना करें। कलश में सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ, थोड़े अक्षत जरूर डालें।
  • कलश के ऊपर आम या अशोक के 5 से 7 पत्ते रखें। फिर कलश का मुंह किसी पात्र से ढक दें और उसके ऊपर थोड़े से अक्षत डाल दें।
  • फिर कलश पर ही घी का दीपक भी रख दें।
  • अब एक करवा (मिट्टी या तांबे का) लेकर उसमें जल भकर रखें।
  • फिर करवे के छेद में 4 सींकें लगा दें। करवे के अंदर आप चांदी का सिक्का या अंगूठी जरूर डालें।
  • इसके बाद इसे किसी चीज से ढक दें और उसके मुख पर कुछ मीठा रख दें।
  • इसी करवे से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
  • इसके बाद एक करवा और तैयार करना है जिसे आप दान करेंगी।
  • आप चाहें तो खांड का करवा भी ले सकती हैं।
  • फिर करवे के अंदर खील, बताशे, मिठाई, गुलगुले, आदि चीजें भर लें।
  • जो महिलाएं घर पर अकेले में करवा चौथ की पूजा करती हैं वो दो करवे भरती हैं एक अपने लिए और एक माता गौरी के लिए।
  • पूजा स्थान पर वो छलनी भी रखें जिससे आपको चांद को अर्घ्य देना है।
  • पूजा स्थल पर कटोरी में गेहूं भरकर भी जरूर रखें।
  • इसके बाद धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर आदि से विधिवत पूजा करें।
  • इसके बाद हाथ में अक्षत लेकर व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • माता को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं और भोग लगाएं।
  • साथ ही करवा चौथ की आरती भी करें।
  • इसके बाद रात में चांद को अर्घ्य दें और छलनी से चांद को देखते हुए पति के दर्शन करें।
  • फिर पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोल लें।
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com