श्रीलंका कोर्ट का बड़ा फैसला: अमेरिकी हमले में मारे गए 84 ईरानी नाविकों के शव सौंपने का आदेश
Sri Lanka Court Order: श्रीलंका की अदालत ने US पनडुब्बी के हमले में डूबे ईरानी युद्धपोत के 84 नाविकों के शवों को उनके दूतावास को सौंपने का आदेश दिया है, जो फिलहाल गाले के अस्पताल में रखे गए हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
ईरानी युद्धपोत IRIS DENA (सोर्स - सोशल मीडिया)
US Attack On Iranian Warship: श्रीलंका के दक्षिणी तट पर पिछले बुधवार को हुई एक दुखद सैन्य घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है जहां एक हमले में कई जानें चली गईं। अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में ईरानी युद्धपोत IRIS DENA के डूबने से 84 नाविकों की जान चली गई थी जो एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया है।
इन नाविकों के दुखी परिवारों के लिए अब राहत की खबर आई है क्योंकि उनके प्रियजनों के पार्थिव शरीर जल्द ही उनके अपने वतन वापस भेजे जाएंगे। श्रीलंका की एक स्थानीय अदालत ने इन शवों को पूरे सम्मान के साथ ईरानी दूतावास को सौंपने का निर्देश दिया है ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो सके।
अदालत का मानवीय और कानूनी फैसला
गाले के मुख्य मजिस्ट्रेट समीर दोडांगोडा ने अस्पताल प्रशासन को सख्त आदेश दिया है कि सभी 84 शवों को तत्काल ईरान के दूतावास के हवाले कर दिया जाए। यह महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया गाले हार्बर पुलिस के विशेष अनुरोध पर शुरू की गई थी ताकि विदेशी नागरिकों के शवों को उनके देश ससम्मान भेजा जा सके। फिलहाल ये शव गाले राष्ट्रीय अस्पताल के दो बड़े फ्रीजर कंटेनर्स में सुरक्षित रखे गए हैं क्योंकि अस्पताल के मुर्दाघर में इतनी बड़ी संख्या के लिए जगह नहीं थी।
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युद्धपोत पर हमले की दर्दनाक कहानी
जानकारी के अनुसार ईरानी युद्धपोत IRIS DENA विशाखापत्तनम में एक नौसैनिक अभ्यास पूरा करने के बाद वापस अपने देश ईरान की ओर शांति से लौट रहा था। तभी श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास गाले के गहरे समुद्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने इस ईरानी जहाज पर अचानक हमला कर दिया जिससे जहाज डूब गया। इस भीषण सैन्य हमले में जहाज पूरी तरह समुद्र में समा गया जिसके बाद श्रीलंका की नौसेना ने एक बड़े सर्च ऑपरेशन में 84 शव बरामद किए थे।
सुरक्षित बचे नाविकों की वर्तमान स्थिति
इस हमले में 84 लोगों की मौत के साथ ही 32 अन्य नाविकों को चमत्कारिक रूप से बचा लिया गया था जिन्हें प्राथमिक इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। इन बचे हुए लोगों को पहले स्थानीय वायु सेना बेस और अब राजधानी कोलंबो के पास एक सुरक्षित नौसैनिक केंद्र में पूरी सुरक्षा के बीच शिफ्ट किया गया है। वे वहां अपने अन्य साथियों के साथ रह रहे हैं क्योंकि युद्ध और तनाव की इस स्थिति में उनकी सुरक्षा और मानसिक देखभाल श्रीलंका की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
दूसरे ईरानी जहाज का तकनीकी संकट
ईरान का एक अन्य जहाज IRIS बुशेहर भी फिलहाल कोलंबो के बाहर समंदर में लंगर डाले हुए खड़ा है क्योंकि उसके इंजन में अचानक तकनीकी खराबी आ गई है। इस विशाल जहाज पर लगभग 204 नाविक सवार हैं जो तकनीकी गड़बड़ी ठीक होने या अगले सरकारी आदेश का वहां रुककर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों की योजना इस खराब पड़े जहाज को जल्द ही मरम्मत के लिए पूर्वी बंदरगाह शहर त्रिंकोमाली ले जाने की है ताकि इसे फिर से चलने लायक बनाया जा सके।
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स्वदेश वापसी की अंतिम तैयारी
अदालत के आदेश के बाद अब श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय और ईरानी दूतावास मिलकर इन शवों को हवाई मार्ग से तेहरान भेजने की कागजी कार्यवाही पूरी करने में जुटे हैं। मारे गए नाविकों के परिवारों के लिए यह एक लंबा और पीड़ादायक इंतजार रहा है लेकिन अब वे अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने की उम्मीद कर सकते हैं। श्रीलंका सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी कानूनी और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं तब तक वह नाविकों और शवों की सुरक्षा सुनिश्चित करती रहेगी।
