साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक से OTP के बिना भी सुरक्षित डिजिटल ट्रांजैक्शन संभव होंगे। (फोटो सोर्स - गूगल इमेज)
Digital Payment Security : देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां अब ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ तकनीक पर काम कर रही हैं, जो डिजिटल लेन-देन को और आसान और सुरक्षित बना सकती है। इस नई तकनीक के जरिए वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की जरूरत खत्म हो सकती है।
सिस्टम बैकग्राउंड में ही यह जांच करेगा कि बैंक ऐप में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और फोन का सिम कार्ड मेल खा रहे हैं या नहीं। अगर दोनों में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा।
इस तकनीक की खास बात यह है कि यूजर को किसी तरह का अतिरिक्त काम नहीं करना होगा। यह सिस्टम eSIM पर भी काम करेगा, जिससे सिम क्लोनिंग और eSIM स्वैप जैसे फ्रॉड को रोका जा सकेगा।
एक्सिस बैंक के डिजिटल बिजनेस हेड समीर शेट्टी के अनुसार, बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर इस तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। वहीं, अगर कोई यूजर ऐप में लॉग-इन है लेकिन उसका नंबर रजिस्टर्ड नंबर से मेल नहीं खाता, तो टेलीकॉम नेटवर्क तुरंत अलर्ट भेज देगा।
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सुरक्षा के लिहाज से भारतीय रिजर्व बैंक ने भी डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को अनिवार्य किया है, जिसमें पासवर्ड, OTP या ऐप कोड और बायोमेट्रिक्स शामिल हैं।
PwC India के साइबर लीडर सुंदरेश्वर कृष्णमूर्ति के मुताबिक, अब सुरक्षा को नेटवर्क लेवल पर मजबूत किया जा रहा है। वहीं, क्लाउड कम्युनिकेशन कंपनी Sinch के MD नितिन सिंघल का कहना है कि इससे ट्रांजैक्शन फेल होने की दर घटेगी, ग्राहकों का अनुभव बेहतर होगा और डिजिटल पेमेंट पर भरोसा बढ़ेगा।