Property Ownership Rules: घर का असली मालिक बनने के लिए केवल रजिस्ट्री काफी नहीं, चाहिए ये जरूरी कागज

Property Ownership Rules: घर खरीदने वालों के लिए अहम खबर है। केवल 100 रुपये की रजिस्ट्री से आप घर के पक्के मालिक नहीं बनते हैं। अब मालिकाना हक के लिए टाइटल डीड व म्यूटेशन भी बहुत जरूरी हैं।
Property Ownership Rules: Registry Alone Is Not Enough For Absolute Ownership Know Required Document 
प्रॉपर्टी ओनरशिप नियम (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Property Ownership Rules Registry Alone Is Not Enough For Absolute Ownership: अगर आप किसी भी शहर में अपनी गाढ़ी कमाई से कोई नया घर या प्लॉट खरीद रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत अहम है। प्रॉपर्टी खरीदने के बाद ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि केवल मकान की 100 रुपये की रजिस्ट्री करा लेने से ही वे संपत्ति के पक्के मालिक बन गए हैं। हालांकि, भारतीय कानून के तहत रजिस्टर्ड सेल डीड संपत्ति ट्रांसफर का एक महत्वपूर्ण सबूत जरूर है, लेकिन यह अपने आप में बिल्कुल पर्याप्त नहीं है। केवल रजिस्ट्री करा लेने भर को किसी भी सूरत में पूर्ण मालिकाना हक का अंतिम और पक्का प्रमाण बिल्कुल नहीं माना जा सकता है।

भारतीय कानून के सख्त नियमों के अनुसार 100 रुपये से अधिक की संपत्ति का कोई भी लेनदेन रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत ही पूरा होता है। इसके बावजूद असली मालिकाना हक साबित करने के लिए प्रॉपर्टी का क्लियर टाइटल और पुराने दस्तावेजों की गहन जांच बेहद जरूरी होती है। आसान शब्दों में टाइटल का सीधा मतलब बेचने वाले के उस पुख्ता कानूनी अधिकार से है, जिससे संपत्ति पर कोई पुराना विवाद बिल्कुल नहीं होता। इससे यह भी पूरी तरह तय हो जाता है कि इस खरीदी गई संपत्ति पर कोई बकाया या कोई अवैध कब्जा बिल्कुल नहीं है।

मालिकाना हक के लिए जरूरी कागज

किसी भी प्रॉपर्टी पर पूर्ण कानूनी मालिकाना हक स्थापित करने के लिए रजिस्टर्ड सेल डीड के साथ-साथ ओरिजिनल टाइटल डीड होना आवश्यक है। यह पुराने मालिकाना हक का रिकॉर्ड होता है जो साबित करता है कि प्रॉपर्टी सही हाथों से ट्रांसफर हुई है। इसके अलावा एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट यह बताता है कि संपत्ति पर कोई पुराना लोन या किसी भी तरह की गिरवी तो नहीं है। पजेशन लेटर और प्रॉपर्टी टैक्स रसीदें आपके वास्तविक कब्जे और पिछले भुगतान का पक्का प्रमाण देती हैं।

नए मकानों के लिए जरूरी नियम

नई इमारतों के मामले में ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट बहुत जरूरी होते हैं जो निर्माण की वैधता साबित करते हैं। अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान यह साबित करते हैं कि निर्माण सरकारी नियमों के तहत और पूरी तरह से वैध तरीके से हुआ है। रजिस्ट्री के बाद नगर निगम या राजस्व रिकॉर्ड में अपना म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज कराना भी बेहद जरूरी होता है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज हो जाता है जिससे टैक्स और बिजली-पानी कनेक्शन में परेशानी नहीं आती।

खरीदने से पहले रखें खास ध्यान

घर या जमीन खरीदने जैसा बड़ा फैसला लेते समय पूरी टाइटल चेन की अच्छी तरह से जांच करना बेहद जरूरी होता है। केवल किसी मकान में लंबे समय तक रहने या किराए पर रहने से कोई भी व्यक्ति कानूनी मालिक नहीं बन जाता। इसके लिए आपके पास ऊपर बताए गए सभी वैध दस्तावेज होना बहुत ही ज्यादा अनिवार्य और जरूरी है। प्रॉपर्टी बेचने वाले की ओनरशिप हिस्ट्री जांचें और सभी सरकारी मंजूरियों की अच्छे से पुष्टि जरूर कर लें।

कानूनी सलाह लेना है बहुत जरूरी

धोखाधड़ी, विरासत के झगड़ों और भविष्य के किसी भी कानूनी विवाद से बचने के लिए सतर्कता बहुत आवश्यक है। खरीदारी के तुरंत बाद बिजली, पानी और अन्य आवश्यक कनेक्शन बिना किसी देरी के अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लें। किसी भी बड़ी प्रॉपर्टी डील से पहले किसी लीगल एक्सपर्ट से दस्तावेजों की कानूनी जांच करवा लेना समझदारी है। ऐसा करने से आप भविष्य में होने वाले किसी भी बड़े नुकसान या धोखे से आसानी से बच सकते हैं।

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