सिंधिया राजघराने की अरबों की संपत्ति का बंटवारा फिर अटका; रिकॉर्ड न मिलने से अदालत में सुनवाई टली

Scindia Family Case: ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की अरबों की संपत्ति के बंटवारे पर कूट सुनवाई 27 जुलाई तक टली, 'कब्जा ही मालिकाना हक' के फॉर्मूले पर ज्योतिरादित्य और बुआओं में बनी सहमति।
The hearing in the multi-crore property partition dispute involving the Scindia royal family has been postponed after required records were not produced before the Gwalior court
सिंधिया रॉयल फैमिली प्रॉपर्टी विवाद (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Scindia Royal Family Property Dispute: देश के चर्चित राजघरानों में शामिल ग्वालियर के सिंधिया राजवंश की अरबों-खरबों रुपये की शाही संपत्तियों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सोमवार को भी अंतिम फैसला नहीं हो सका। न्यायालय में प्रस्तावित महा-समझौते पर सुनवाई एक बार फिर टल गई।

जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट से बुआओं के दावे से जुड़ा आवश्यक रिकॉर्ड समय पर जिला न्यायालय नहीं पहुंच सका, जिसके कारण अदालत ने सुनवाई को 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले भी 8 जुलाई को रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई टालनी पड़ी थी। अब सभी पक्षों की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां समझौते पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच बनी सहमति

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जिला न्यायालय में समझौता आवेदन पेश किया गया है। प्रस्तावित समझौते के अनुसार, सिंधिया राजघराने के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआएं—राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा सहित परिवार के अन्य सदस्यों के बीच शाही विरासत के बंटवारे पर सिद्धांततः सहमति बन चुकी है। समझौते में यह भी तय किया जाना है कि परिवार के किस सदस्य के पास कौन-कौन सी संपत्तियां रहेंगी। यदि अदालत इस समझौते को मंजूरी देती है तो वर्षों से चले आ रहे पारिवारिक विवाद का अंत हो जाएगा।

'कब्जा ही मालिकाना हक' के आधार पर होगा संपत्ति का बंटवारा

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते का सबसे अहम आधार यह है कि जिस पक्ष के कब्जे में वर्तमान में जो संपत्ति है, उसी को उसका अंतिम मालिक माना जाएगा। इसी आधार पर ग्वालियर का ऐतिहासिक जयविलास पैलेस और शिवपुरी की कई संपत्तियां ज्योतिरादित्य सिंधिया के हिस्से में आने की संभावना है। वहीं, पूर्व के रिकॉर्ड या ट्रस्ट के नाम दर्ज संपत्तियों को भी वर्तमान कब्जे के आधार पर कोर्ट से डिक्री कराकर वैध स्वामित्व दिया जाएगा।

सिंधिया राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां संस्थाओं के अधीन

सिंधिया राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां वर्षों से सर जयाजीराव ट्रस्ट और कृष्ण माधव ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के अधीन हैं, जबकि दिल्ली स्थित सिंधिया पॉटरीज की जमीन पर बनी आलीशान कोठियों में वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे निवास करती हैं। इसके अलावा सिंधिया इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड का संचालन वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास है।

एक दर्जन से अधिक मुकदमों का होगा पटाक्षेप

ग्वालियर जिला न्यायालय में दाखिल दावों के अनुसार यह समझौता ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा, कनिका देवी, प्रतिमा देवी और चित्रांगदा राजे सहित परिवार के प्रमुख सदस्यों के बीच होना है। जानकारी के मुताबिक, बुआओं की ओर से अगले सप्ताह अदालत में औपचारिक आवेदन भी प्रस्तुत किया जा सकता है, जिसके बाद समझौते पर अंतिम न्यायिक मुहर लगने का रास्ता साफ होगा।

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