बैंक ट्रांजैक्शन के लिए IFSC और MICR कोड क्यों है जरूरी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Secure Digital Banking Process: आज के डिजिटल दौर में बैंक से लेनदेन करना बहुत ही आसान और तेज हो गया है। हालांकि सुरक्षित बैंकिंग के लिए कुछ तकनीकी शब्दों को समझना हमारे लिए जरूरी है। पैसे भेजने या चेक से भुगतान करने के लिए दो मुख्य कोड काम करते हैं। इनमें से एक IFSC और दूसरा MICR कोड है जो बैंकिंग को भरोसेमंद बनाते हैं।
IFSC यानी इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड ग्यारह अंकों का एक विशेष अल्फान्यूमेरिक कोड होता है। यह कोड देश की प्रत्येक बैंक शाखा को उसकी एक अलग और विशिष्ट पहचान देता है। आपकी बैंक चेकबुक पर प्रिंट होने वाला यह कोड डिजिटल लेनदेन का मुख्य आधार है।
इस कोड के पहले चार अक्षर संबंधित बैंक के नाम को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। पांचवां अक्षर हमेशा शून्य होता है जो बैंक और शाखा के बीच सेपरेटर का काम करता है। अंतिम छह अक्षर सीधे तौर पर संबंधित बैंक की विशिष्ट शाखा की सटीक पहचान बताते हैं।
इसका उपयोग मुख्य रूप से एनईएफटी, आरटीजीएस और आईएमपीएस जैसे ऑनलाइन सिस्टम में होता है। यह सुनिश्चित करता है कि पैसा बिना किसी गलती के सही बैंक शाखा तक पहुंच जाए। भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर सभी बैंकों के कोड आसानी से मिल जाते हैं।
MICR यानी मैगनेटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन नौ अंकों का एक विशेष न्यूमेरिक कोड है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से चेक क्लियरिंग की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जाता है। यह कोड चेक के निचले हिस्से में मैग्नेटिक इंक से छपा होता है जिसे मशीन पढ़ती है।
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इस नौ अंकों के कोड के पहले तीन अंक शहर के पिन कोड को दर्शाते हैं। बीच के तीन अंक बैंक की पहचान बताते हैं और अंतिम तीन अंक शाखा कोड होते हैं। इस तकनीक की मदद से चेक की प्रोसेसिंग काफी सुरक्षित और त्रुटिरहित हो जाती है।
IFSC ऑनलाइन फंड ट्रांसफर के लिए है जबकि MICR चेक क्लियरिंग के लिए जरूरी है। IFSC ग्यारह अंकों का कोड है लेकिन MICR केवल नौ अंकों का न्यूमेरिक कोड होता है। डिजिटल बैंकिंग में IFSC की भूमिका है जबकि पारंपरिक बैंकिंग में MICR अहम है।
Ans: इसका पूरा नाम इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड है और यह 11 अंकों का एक अल्फान्यूमेरिक कोड होता है।
Ans: नहीं, MICR कोड का इस्तेमाल मुख्य रूप से चेक क्लियरिंग प्रक्रिया में मशीनों द्वारा पढ़ने के लिए किया जाता है।
Ans: IFSC कोड में पांचवां अक्षर हमेशा ‘0’ (जीरो) होता है, जो बैंक नाम और शाखा कोड के बीच सेपरेटर का काम करता है।
Ans: पहले तीन अंक शहर का पिन कोड, बीच के तीन अंक बैंक की पहचान और अंतिम तीन अंक शाखा का कोड बताते हैं।
Ans: आप अपनी बैंक चेकबुक, बैंक पासबुक या भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से यह कोड प्राप्त कर सकते हैं।