
KYC vs CKYC vs eKYC में अंतर और ये आपके लिए क्यों हैं जरूरी? (सोर्स-सोशल मीडिया)
Digital Identity Verification Process: वित्तीय और डिजिटल क्षेत्रों में किसी भी व्यक्ति या संस्था की पहचान सत्यापित करने के लिए डिजिटल आइडेंटिटी वेरिफिकेसन प्रोसेस का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके लिए मुख्य रूप से KYC, eKYC और CKYC जैसी तीन अलग-अलग प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है जिनका उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि इन तीनों का अंतिम लक्ष्य नियामक अनुपालन और धोखाधड़ी को रोकना है, लेकिन उनकी तकनीक और उपयोग में बड़े अंतर हैं। यहां हम विस्तार से जानेंगे कि ये तीनों प्रक्रियाएं कैसे काम करती हैं और निवेशकों के लिए कौन सी प्रक्रिया ज्यादा बेहतर है।
KYC यानी ‘नो योर कस्टमर’ वित्तीय संस्थानों और विभिन्न व्यवसायों द्वारा अपनाई जाने वाली एक पारंपरिक और पुरानी प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों की पहचान सत्यापित करना और मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद वित्त पोषण जैसे जोखिमों को कम करना है। इस प्रक्रिया में ग्राहकों को सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र और पते के प्रमाण जैसे डाक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं।
पारंपरिक KYC में मैन्युअल कागजी कार्रवाई और व्यक्तिगत रूप से सत्यापन की आवश्यकता होती है, जो काफी समय लेने वाला काम है। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अक्सर भौतिक रूप से दस्तावेज उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इसके अलावा, मैन्युअल प्रक्रिया होने के कारण इसमें दस्तावेज़ों की जालसाजी और मानवीय त्रुटियों का सुरक्षा जोखिम हमेशा बना रहता है।
eKYC पारंपरिक KYC का एक आधुनिक और डिजिटल रूप है जो बायोमेट्रिक्स और ओटीपी (OTP) के जरिए रिमोट तरीके से काम करता है। आधार प्रमाणीकरण के उपयोग से यह प्रक्रिया पूरी तरह से पेपरलेस बन गई है, जिससे बैंकिंग और टेलीकॉम क्षेत्रों में ऑनबोर्डिंग आसान हो गई है। यह तकनीक उन लोगों के लिए बहुत सुविधाजनक है जो घर बैठे अपनी पहचान का ऑनलाइन सत्यापन पूरा करना चाहते हैं।
सुरक्षा के लिहाज से देखें तो eKYC डिजिटल प्रमाणीकरण तकनीकों का उपयोग करके पहचान धोखाधड़ी के जोखिम को काफी हद तक कम करती है। डिजिटल और मानकीकृत प्रक्रिया होने के कारण इसके जरिए नियामक अनुपालन को पूरा करना संस्थाओं के लिए बहुत आसान हो जाता है। इसकी यूजर-फ्रेंडली और तेज प्रक्रिया के कारण आज के समय में अधिक से अधिक नए निवेशक बाजार में आकर्षित हो रहे हैं।
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CKYC दरअसल KYC रिकॉर्ड्स का एक केंद्रीकृत डेटाबेस है जिसका उद्देश्य विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के बीच जानकारी साझा करना है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहक को हर नई संस्था के साथ बार-बार KYC कराने की जरूरत नहीं पड़ती है। केंद्रीकृत प्रणाली होने से डुप्लीकेट रिकॉर्ड्स की समस्या खत्म होती है और धोखाधड़ी की संभावना भी बहुत कम हो जाती है।
जब निवेशक का डेटा एक सुरक्षित और केंद्रीकृत डेटाबेस में स्टोर होता है, तो इससे डेटा की सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों बढ़ती हैं। ग्राहक अपने विवरण को एक ही जगह अपडेट करके कई वित्तीय संस्थाओं में उसे लागू करवा सकते हैं, जिससे उनका काफी समय बचता है। इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया के कारण निवेशकों के लिए बाजार में भागीदारी करना और अलग-अलग संस्थाओं से जुड़ना बहुत सरल हो गया है।
Ans: इसका उद्देश्य ग्राहकों की पहचान सत्यापित करना और धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्त पोषण के जोखिम को कम करना है।
Ans: eKYC एक डिजिटल और पेपरलेस प्रक्रिया है जो बायोमेट्रिक्स और OTP का उपयोग करती है, जबकि पारंपरिक KYC में भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।
Ans: CKYC का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह बार-बार केवाईसी कराने की आवश्यकता को खत्म करता है क्योंकि डेटा एक केंद्रीकृत डेटाबेस में सुरक्षित रहता है।
Ans: हां, eKYC डिजिटल प्रमाणीकरण तकनीक जैसे बायोमेट्रिक्स का उपयोग करती है, जो पहचान धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में मदद करती है।
Ans: सरल ऑनबोर्डिंग और केंद्रीकृत डेटा की सुविधा से निवेशक कई संस्थाओं के साथ आसानी से जुड़ सकते हैं, जिससे बाजार में निवेश बढ़ता है।






