शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कौन सा लोन है बेहतर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Choosing Right Loan Tenure: अक्सर लोग लोन लेते समय केवल कम मासिक किस्तों यानी EMI को देखकर ही अपना फैसला ले लेते हैं। लेकिन वित्तीय समझदारी कहती है कि असली खेल लोन की समय सीमा या अवधि में छिपा होता है। सही लोन अवधि चुनना के लिए आपको अपनी आय और कुल खर्चों का सही आकलन करना चाहिए। आइये जानते हैं कि आपके भविष्य और बचत के लिए कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।
पर्सनल लोन लेते समय अधिकतर लोगों को लगता है कि कम EMI देना ही सबसे अच्छा और फायदेमंद सौदा है। लेकिन हकीकत में लॉन्ग टर्म लोन आपकी मासिक किस्तों को तो कम कर देता है पर कुल ब्याज बढ़ा देता है। वहीं शॉर्ट टर्म लोन में आपको हर महीने ज्यादा पैसे देने होते हैं लेकिन आप जल्दी कर्ज मुक्त हो जाते हैं।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं जहां आपने 12% ब्याज दर पर 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया है। अगर आप इस राशि को 3 साल में चुकाते हैं तो आपकी EMI ज्यादा होगी पर कुल ब्याज काफी कम रहेगा। वहीं 5 साल की अवधि चुनने पर EMI भले ही कम हो जाए लेकिन आपको हजारों रुपये ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा।
अगर आपकी मासिक आय पूरी तरह स्थिर है और आप हर महीने कुछ बचत कर पा रहे हैं तो यह विकल्प बेहतर है। शॉर्ट टर्म लोन चुनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप बहुत कम समय में अपना पूरा कर्ज चुका देते हैं। जल्दी कर्ज मुक्त होने से आपको मानसिक सुकून मिलता है और आप भविष्य के निवेश की योजना बना सकते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि लोन लेते समय केवल EMI नहीं बल्कि कुल भुगतान पर ध्यान देना जरूरी है। अगर आप अपनी जरूरतों को कम करके थोडा ज्यादा भुगतान कर सकते हैं तो शॉर्ट टर्म ही सबसे अच्छा है। इससे आप बैंक को अतिरिक्त ब्याज देने से बच जाते हैं और अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखते हैं।
अगर आप स्वरोजगार में हैं या आपकी मासिक आय अनियमित है तो ज्यादा EMI आपके लिए काफी जोखिम भरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसी महीने आय कम होने पर आपकी किस्त डिफॉल्ट हो सकती है जिससे भारी पेनल्टी लगती है। किस्त न भर पाने का सीधा बुरा असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है जिससे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल होता है।
इसलिए अगर आपकी आय में उतार-चढ़ाव रहता है तो लॉन्ग टर्म लोन चुनना एक बहुत ही समझदारी भरा कदम है। भले ही इसमें ब्याज थोड़ा ज्यादा देना पड़े लेकिन यह आपको मानसिक तनाव और डिफॉल्ट के खतरे से बचाता है। कम EMI होने के कारण आपके पास रोजमर्रा के खर्चों के लिए हाथ में पर्याप्त नकदी हमेशा बनी रहती है।
लोन की अवधि का फैसला करने से पहले आपको अपने घर के सभी जरूरी खर्चों की एक सूची बनानी चाहिए। इसमें घर का किराया, बच्चों की स्कूल फीस, बीमा प्रीमियम और अन्य सभी छोटी-बड़ी जरूरतों को शामिल करें। कोशिश करें कि आपके सभी लोन की कुल किस्तें आपकी शुद्ध मासिक आय के 40-50% से अधिक कतई न हों।
अगर शॉर्ट टर्म चुनने से आपके खर्चों का बजट बिगड़ रहा है तो मजबूरी में ही सही लॉन्ग टर्म चुनना सही है। वित्तीय संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है ताकि लोन चुकाने के चक्कर में आपकी जरूरी जरूरतें प्रभावित न हों। हमेशा अपनी वित्तीय क्षमता के भीतर रहकर ही किसी भी तरह के कर्ज या उधार का चुनाव करना चाहिए।
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होम लोन के मामले में स्थिति थोड़ी अलग होती है क्योंकि यहां ब्याज दरें पर्सनल लोन से काफी कम होती हैं। साथ ही होम लोन पर आपको सेक्शन 24 और 80C के तहत आयकर में अच्छी खासी टैक्स छूट भी मिलती है। इसलिए होम लोन को लंबी अवधि के लिए लेकर बचे हुए पैसों को कहीं निवेश करना एक स्मार्ट तरीका है।
लेकिन अगर आपका पर्सनल लोन पर ब्याज दर 14-16% के आसपास है तो इसे जल्दी चुकाना ही फायदेमंद है। इतने ऊंचे ब्याज वाले कर्ज को जितना लंबा खींचेंगे आपकी आर्थिक स्थिति उतनी ही कमजोर और खराब होती जाएगी। सही समय पर सही फैसला लेकर आप अपनी वित्तीय सेहत को काफी हद तक सुधार सकते हैं और सुरक्षित कर सकते हैं।