1 जुलाई से बदल जाएगा मनरेगा! अब 125 दिन के काम का मिलेगा हक, नए कानून से ग्रामीणों की चमकेगी किस्मत
New Rural Jobs: केंद्र सरकार 1 जुलाई से मनरेगा की जगह नया VB-GRAMG कानून लागू कर रही है। अब ग्रामीणों को हर साल 100 की जगह 125 दिन का रोजगार मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है।
- Written By: प्रिया सिंह
मनरेगा होगा VB-GRAMG (सोर्स- AI)
Guaranteed Rural Jobs Act: केंद्र सरकार ने देश में ग्रामीण रोजगार से जुड़ा एक बहुत ही महत्वपूर्ण और नया कानून लागू करने की आधिकारिक अधिसूचना सोमवार को जारी कर दी है। इस नए और प्रभावी कानून का नाम विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (VB-GRAMG) 2025 रखा गया है। यह नया कानून देश में लगभग 20 साल पुराने मनरेगा (MGNREGA) कानून को पूरी तरह से बदल देगा और उसकी जगह लेगा। सरकार का यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से पूरे भारतवर्ष में पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा।
इस नई अधिसूचना के जारी होने के बाद सभी राज्य सरकारों को अपने सिस्टम और कर्मचारियों को तैयार करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। लोकसभा और राज्यसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक को दिसंबर 2025 में ही पूर्ण रूप से पारित कर दिया गया था। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अब इसे लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक आर्थिक बदलाव लेकर आएगी।
रोजगार के दिनों में होगी बढ़ोतरी
पुराने मनरेगा कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक साल में केवल 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी मिलती थी। लेकिन इस नए कानून के लागू होने से अब हर पात्र परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन का काम दिया जाएगा। इस प्रकार नए नियमों के अनुसार ग्रामीणों को पहले के मुकाबले 25 दिन ज्यादा काम करने का शानदार अवसर मिलेगा।
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पहले मनरेगा में राज्य सरकारें अपना प्लान भेजती थीं और केंद्र सरकार बिना किसी सीमा के पूरा फंड देती थी। अब नए नियम के तहत केंद्र सरकार हर राज्य के लिए खर्च की एक स्पष्ट सीमा पहले से ही तय कर देगी। अगर कोई राज्य इस निर्धारित सीमा से ज्यादा पैसा खर्च करता है, तो वह अतिरिक्त राशि राज्य को स्वयं देनी होगी।
इस नई योजना में पैसों को बांटने का तरीका 60:40 के अनुपात में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। इसका मतलब है कि कुल खर्च का 60% केंद्र सरकार और 40% राज्य सरकारें अपनी तरफ से वहन करेंगी। वहीं पूर्वोत्तर, हिमालयी राज्यों और बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र सरकार की ओर से ज्यादा आर्थिक सहायता मिलेगी।
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क्या है योजना का कुल बजट?
इस विशाल और महत्वाकांक्षी योजना पर हर साल लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये का कुल खर्च आने का अनुमान लगाया गया है। इस बड़ी धनराशि में राज्यों का हिस्सा भी शामिल है, जबकि इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा लगभग 95,700 करोड़ रुपये रहेगा। सरकार की यह भारी भरकम आर्थिक पहल ग्रामीण विकास को एक नई और मजबूत दिशा प्रदान करने में सफल होगी।
इस नए कानून के तहत यह भी तय किया गया है कि हर काम की योजना सीधे विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) से ली जाएगी। बाद में इन सभी छोटी योजनाओं को ऊपरी स्तर पर ले जाकर विकसित भारत नेशनल रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टैक के साथ जोड़ा जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और रोजगार बढ़ाने में बहुत मददगार साबित होगी।
