

Baggage Claim Rules in India: हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों का चेक्डइन लगेज खोना या डैमेज होना एक बेहद गंभीर और मानसिक तनाव देने वाली समस्या है। ऐसे खराब अनुभवों से निपटने के लिए भारतीय विमानन नियामक डीजीसीए ने यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु कड़े नियम बनाए हैं।
इन सुरक्षा नियमों के अंतर्गत अगर किसी यात्री का बैग हवाई सफर के दौरान गुम या टूटा हुआ मिलता है, तो वह एयरलाइन से मुआवजे का हकदार है। अक्सर यात्रियों को अपने इन कानूनी अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे वे बिना किसी शिकायत के भारी आर्थिक नुकसान सहते हैं।
विमानन नियमों के अनुसार, जैसे ही बेल्ट पर बैग गायब होने या उसके क्षतिग्रस्त होने का पता चले, एयरपोर्ट से बाहर न निकलें। अराइवल हॉल में स्थित संबंधित एयरलाइन के बैगेज काउंटर पर जाकर तुरंत पीआईआर यानी प्रॉपर्टी इरेगुलरिटी रिपोर्ट दर्ज कराना आवश्यक है।
इस दर्ज की गई शिकायत की कॉपी और विशिष्ट रेफरेंस नंबर को बहुत संभालकर रखना चाहिए, क्योंकि इसके बिना आगे क्लेम पाना संभव नहीं है। अगर हवाई अड्डे के अधिकारी आपकी शिकायत पर ध्यान न दें, तो आप सीधे एयरसेवा पोर्टल या नागरिक विमानन मंत्रालय से संपर्क कर सकते हैं।
अगर आपका बैग चोरी या डैमेज हो गया है, तो यात्री को घटना के 7 दिन के भीतर संबंधित एयरलाइन को लिखित शिकायत भेजनी होगी। इस लिखित आवेदन के साथ यात्रियों को अपने डैमेज बैग के हैंडल, पहिए या फटे हुए हिस्सों की स्पष्ट फोटो भी लगानी होगी।
नियमों के तहत एयरलाइन या तो क्षतिग्रस्त बैग के मरम्मत का पूरा खर्च उठाएगी या मूल्य के अनुसार नया बैग प्रदान करेगी। यात्रियों को सुरक्षित क्लेम प्रक्रिया के लिए अपना बोर्डिंग पास, लगेज टैग स्टिकर और बैंक खाता विवरण भी साथ में जमा करना होगा।
अगर बैग मिलने में 24 घंटे से अधिक का समय लगता है, तो एयरलाइन रोजमर्रा के जरूरी सामान के लिए मुआवजा राशि देने को बाध्य है। वहीं अगर कोई बैग लगातार 21 दिन तक नहीं मिलता है, तो उसे कानूनी तौर पर पूरी तरह से खोया हुआ घोषित कर दिया जाता है।
घरेलू उड़ानों में लगेज खोने पर प्रति किलो के हिसाब से अधिकतम 20,000 रुपये तक की मुआवजा राशि पाने का स्पष्ट नियम है। अगर एयरलाइन उचित रिफंड देने से मना करती है, तो पीड़ित यात्री उपभोक्ता फोरम में सेवा में कमी का मामला भी दर्ज करा सकते हैं।