बिहार में यहां स्थित है लोकप्रिय मुंडेश्वरी मंदिर, जो कहलाता है देश का पुराना फंक्शनल मंदिर
बिहार के इस मुंडेश्वरी मंदिर की जो सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है। इतना ही नहीं इसे देश का सबसे पुराना फंक्शनल मंदिर भी कहते है।वहीं पर इस मंदिर में भगवान शिव और शक्ति की पूजा की जाती है तो वहीं पर वह देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं।
- Written By: दीपिका पाल
मुंडेश्वरी मंदिर (सौ- सोशळ मीडिया)
देश में कई प्राचीन मंदिर और उनकी प्रचलित परंपराएं है जिन्हें जानने में हर किसी को मजा आता ही है आज हम बात कर रहे है बिहार के इस मुंडेश्वरी मंदिर की जो सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है। इतना ही नहीं इसे देश का सबसे पुराना फंक्शनल मंदिर भी कहते है। इस मंदिर की कई रोचक बातें है जो आपको जानना जरूरी है।
जानिए इस फंक्शनल मंदिर के बारे में
इस मंदिर की बात करें तो, राज्य के कैमूर जिले में स्थित मुंडेश्वरी मंदिर देश के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में एक कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था जहां पर दर्शन करने के लिए राज्य ही नहीं बल्कि दुनियाभर से लोग आते है। इस मंदिर की बात की जाए तो यहां पर भगवान शिव और शक्ति की पूजा की जाती है जो इतिहास और वास्तुकला से अद्भुत सजा हुआ है। अगर आप इस राज्य में घूमने का प्लान कर रहे है तो तो आपके लिए बेहद शानदार ऑप्शन में से एक है।
कितना प्राचीन है ये मंदिर
इस मंदिर की बात की जाए तो, इस मंदिर का निर्माण शक काल के दौरान 108 ईस्वी के आसपास हुआ था इसके साथ ही यह मंदिर 1900 वर्ष से अधिक पुराना मंदिर बताया जा रहा है। इतना ही नहीं इस मंदिर में प्रेमी भी इस मंदिर का दौरा करने के लिए अवश्य आते हैं। इसे एक तरह से दुनिया का सबसे पुराना फंक्शनल मंदिर के रूप में जानते है।
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मुंडेश्वरी मंदिर (सौ-सोशल मीडिया)
जानिए क्या है मंदिर की खासियत
इस मंदिर की खासियत की बात की जाए तो, इसकी डिजाइन आर्किटेक्चरल बनी हुई है जिसमें एक असामान्य अष्टकोणीय आकृति है, जो भारतीय मंदिर वास्तुकला में अमूमन देखने के लिए मिलती है इतना ही नहीं इसकी विशिष्टता समय के उन्नत वास्तुशिल्प ज्ञान को भी दर्शाता है। वहीं पर इस मंदिर में भगवान शिव और शक्ति की पूजा की जाती है तो वहीं पर वह देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं। इसके अलावा, मंदिर में गणेश, विष्णु और सूर्य आदि देवताओं की मूर्तियां भी हैं, जिनकी लोग पूजा करते हैं।
मंदिर को मिला है एएसआई संरक्षण
यहां पर इस मंदिर की बात की जाए तो, इसे सबसे पुराना मंदिर होने के नाते एएसआई यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने संरक्षित स्मारक के रूप में सूचीबद्ध किया है। इतना ही नहीं इसे दुनिया की सबसे प्राचीन संरचनाओं में से एक होने के कारण इसकी महत्ता कई गुना बढ़ जाती है। इसकी देखभाल की जाती है।
