Lord Shiva Temple: इस रहस्यमयी मंदिर में आज भी भगवान शिव के क्रोध से खौलता है पानी
भगवान शिव का यह अनोखा मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से करीब 45 किमी दूर मणिकर्ण में स्थित है। यह मंदिर हिंदू और सिख दोनों ही धर्मों का एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। मणिकर्ण से होकर पार्वती नदी बहती है।
- Written By: प्रीति शर्मा
इस रहस्यमयी मंदिर में आज भी भगवान शिव के क्रोध से खौलता है पानी
Manikaran Shiva Temple: भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो खुद में बहुत ही रहस्यमयी हैं। देश में भगवान शिव से जुड़े कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिर हैं। जहां किसी मंदिर में शिवलिंग साल दर साल बढ़ रहा है, तो कहीं शिव मंदिर कलयुग के अंत का संकेत दे रहा है। इन्हीं में एक भगवान शिव का ऐसा मंदिर भी है जहां कड़कड़ाती ठंड में भी पानी उबलता है। इसके पीछे का रहस्य आजतक किसी को पता नहीं चला है। इस मंदिर और यहां के उबलते पानी से जुड़ी पौराणिक कथा भी प्रचलित है। आइए, जानते हैं इस रहस्यमयी मंदिर के पीछे की कहानी क्या है।
कहां है भगवान शिव का रहस्यमयी मंदिर
भगवान शिव का यह अनोखा मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से करीब 45 किमी दूर मणिकर्ण में स्थित है। यह मंदिर हिंदू और सिख दोनों ही धर्मों का एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। मणिकर्ण से होकर पार्वती नदी बहती है जिसके एक तरफ शिव मंदिर है। वहीं दूसरी तरफ गुरु नानक देव का ऐतिहासिक गुरुद्वारा भी मौजूद है। जिसे मणिकर्ण साहिब के नाम से जाना जाता है। यहां पर आज भी पानी उबलता है जिसके पीछे का रहस्य अब तक नहीं सुलझा पाया है।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है। लेकिन जब वह क्रोध में आते हैं तो उनके प्रकोप से कोई नहीं बच पाता है। कहा जाता है कि एक बार नदी में क्रीड़ा करते हुए माता पार्वती जी के कान का एक कुंडल का मणि पानी में गिर गया जो बहते हुए पाताल लोक में पहुंच गया था। भगवान शिव ने इस मणि को ढूंढने के लिए अपने गणों को भेजा लेकिन वह नहीं मिला। जिसकी वजह से भगवान शिव नाराज हो गए और अपना रौद्र रूप धारण कर तीसरा नेत्र खोल लिया। महादेव के क्रोध से नदी का पानी उबलने लगा। माना जाता है कि यह आज तक उबल रहा है।
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भगवान शिव के विकराल रूप देखकर नैना देवी प्रकट हुई और उन्होंने शेषनाग से भगवान शिव का मणि वापस लौटाने के लिए कहा। जिसके बाद शेषनाग ने माता पार्वती का मणि लौटा दिया और जोर से फुंकार भरी। जिसकी वजह से जगह-जगह मणियां धरती लोक पर आ गई। माता पार्वती की मणि मिलने के बाद भगवान शिव ने सभी मणियों को पत्थर बनाकर नदी में वापस डाल दिया। मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र जल में स्नान करने से त्वचा रोग खत्म हो जाते हैं।
