प्रतीकात्मक इमेज (सोर्स- सोशल मीडिया)
Why Israelis visit India: हर साल हिमाचल प्रदेश हजारों इजरायली युवाओं का स्वागत करता है, जो अपनी अनिवार्य दो साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद कुछ समय के लिए भारत घूमने आते हैं। प्राकृतिक सुंदरता और शांति की तलाश में ये युवा खास तौर पर धर्मकोट का रुख करते हैं, जो धौलाधार पहाड़ियों के बीच बसा एक शांत गांव है। यहां इजरायली पर्यटकों की इतनी अधिक मौजूदगी है कि इसे अब ‘पहाड़ों का तेल अवीव’ भी कहा जाने लगा है। यह जगह उन्हें सुकून, आत्मचिंतन और नई ऊर्जा पाने का अवसर देती है।
मार्च महीने से ही इजरायली पर्यटक हिमाचल प्रदेश की ओर आना शुरू कर देते हैं और अक्टूबर तक उनकी संख्या लगातार बढ़ती रहती है। इसके बाद कई पर्यटक गोवा का रुख करते हैं। सैन्य सेवा पूरी कर भारत पहुंचीं एक युवती ने मीडिया को बताया कि इजरायलियों के लिए भारत दूसरे घर जैसा महसूस होता है जहां की संस्कृति, इतिहास और लोगों के प्रति गहरा आकर्षण है। धर्मकोट जो धर्मशाला से करीब 13 किलोमीटर दूर है वहां हिब्रू भाषा के बोर्ड आम दिखते हैं। यहां स्थित चबाड हाउस यहूदी समुदाय का प्रमुख केंद्र है। गांव के गेस्ट हाउस इजरायली पर्यटकों से भरे रहते हैं और स्थानीय कैफे में फलाफल व हम्मस जैसे व्यंजन आसानी से मिल जाते हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, तेल अवीव से आए एक व्यक्ति ने बताया कि कि इजरायल जहां शहरों और रेगिस्तानी इलाकों के लिए जाना जाता है, वहीं हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियां उन्हें गहरा आध्यात्मिक सुकून देती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इजरायली पर्यटक अक्सर समूह में रहते हैं और सीमित मेलजोल रखते हैं। वे दिन का अधिक समय आराम, बातचीत और खाने-पीने में बिताते हैं, जबकि कुछ लोग हिमालयी रास्तों पर ट्रेकिंग के लिए निकल जाते हैं। शाम के समय कई लोग धर्मकोट में इकट्ठा होते हैं और कसोल भी उनकी पसंदीदा जगहों में शामिल है, जहां वे संगीत, नृत्य और खुले माहौल का आनंद लेते हैं।
इजरायल के युवा सैन्य सेवा के बाद भारत आकर मानसिक शांति, आत्मचिंतन और सुकून पाते हैं। यहां की संस्कृति, आध्यात्मिक माहौल, पहाड़ों की शांति और लोगों की सादगी उन्हें आकर्षित करती है जिससे वह जीवन को नए नजरिये से देख पाते हैं।