कोलकाता का हावड़ा ब्रिज 40 साल में पहली बार इतने घंटों के लिए रहेगा बंद, जानें इससे जुड़ा इतिहास
हुगली नदी पर बना हावड़ा ब्रिज हावड़ा और कोलकाता को आपस में जोड़ने का काम करता है। इस ब्रिज को स्वास्थ्य जांच के लिए पहली बार बंद किया गया है। हावड़ा ब्रिज करीब 5 घंटे के लिए बंद रहेगा।
- Written By: प्रीति शर्मा
हावड़ा ब्रिज (सौ.सोशल मीडिया)
कोलकाता: हुगली नदी पर बना हावड़ा ब्रिज हावड़ा और कोलकाता को आपस में जोड़ने का काम करता है। इस ब्रिज को स्वास्थ्य जांच के लिए पहली बार बंद किया गया है। हावड़ा ब्रिज करीब 5 घंटे के लिए बंद रहेगा। इस दौरान ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही नहीं होगी। जानकारी के अनुसार यह ब्रिज करीब 40 सालों में पहली बार कई घंटों के लिए बंद किया गया है। ब्रिज को शनिवार 16 नवंबर 11.30 बजे से रविवार सुबह 4.30 बजे तक के लिए पूरी तरह से बंद किया गया है।
हावड़ा ब्रिज की बारीकी से जांच करने के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट ट्रस्ट ने विशेषज्ञों की मदद ली है। जिसका उद्देश्य इस बात की जांच करना है कि यह कमजोर या क्षति ग्रस्त हो नहीं हुआ। जिसका ऑडिट किया जाएगा। यह ट्रस्ट 1983 के बाद पहली बार इस ब्रिज का ऑडिट करेगा।
कब शुरू हुआ हावड़ा ब्रिज का निर्माण
हावड़ा ब्रिज अपनी खूबसूरती और बनावट की वजह से भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यह हुगली नदी पर बना हुआ है जिसे ब्रिटिश सरकार ने 1936 में बनाना शुरू किया था। इस ब्रिज को बनाने का काम साल 1942 में जाकर पूरा हुआ। जानकारी के अनुसार इसे बनाने के लिए करीब 26 हजार टन स्टील का इस्तेमाल किया गया था। जिसमें से 23 हजार टन टिस्को स्टील की सप्लाई टाटा स्टील ने की थी। जिसकी वजह से इसके निर्माण का श्रेय टाटा स्टील और बीबीजे कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के कामगारों को दिया जाता है।
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हावड़ा ब्रिज को बनाना आसान काम नहीं था लेकिन तमाम बाधाओं के बावजूद इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ। यह अनोखा ब्रिज हुगली नदी के किनारों पर बने 280 फीट ऊंचे दो पिलरों पर टिका हुआ है। इस पिलरों के बीच करीब डेढ़ हजार फीट की दूरी है।
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80 साल बाद भी बरकरार है खूबसूरती
कोलकाता के इस हावड़ा ब्रिज को भले ही अंग्रेजों ने बनवाया था लेकिन इसका नामकरण भारत सरकार ने किया। भारत के नोबेल प्राइज विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर ही इस ब्रिज का नाम 1965 में रवींद्र सेतु कर दिया गया। इस ब्रिज को करीब 80 साल से भी ज्यादा का समय हो गया है लेकिन इसकी खूबसूरती आज भी बरकरार है। इसे देखने के लिए लोग दुनियाभर से आते हैं।
