वैज्ञानिकों ने बनाया जिंदा सीमेंट, अब घर की दीवारें बनेंगी बैटरी
Supercapacitor Cement: वैज्ञानिकों ने ऐसा सीमेंट तैयार किया है जिसमें जीवन मौजूद है। नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने अमेरिकी विशेषज्ञों की मदद से कुछ अनोखा बनाया है जो आने वाले समय का भविष्य बनेगा।
- Written By: सिमरन सिंह
क्या है विज्ञानिको का नया आविश्कार। (सौ. AI)
Living Cement Discovered by Scientists: तकनीक की दुनिया में बड़ा बदलाव लाने वाली खोज सामने आई है। वैज्ञानिकों ने ऐसा सीमेंट तैयार किया है जिसमें जीवन मौजूद है। नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने अमेरिकी विशेषज्ञों की मदद से इस अनोखे सीमेंट का निर्माण किया है। इसमें खास किस्म के बैक्टीरिया को मिलाया गया है, जो बिजली को सोखने और जरूरत पड़ने पर छोड़ने की क्षमता रखते हैं। यानी यह सीमेंट केवल इमारत बनाने का साधन नहीं रहेगा, बल्कि एक बैटरी की तरह काम भी करेगा।
बैक्टीरिया से बनी ऊर्जा-संचयक दीवारें
वैज्ञानिकों ने इस सीमेंट में Shewanella Oneidensis MR-1 नामक बैक्टीरिया मिलाए हैं। ये बैक्टीरिया इलेक्ट्रॉन बाहर छोड़ते हैं, जिससे सीमेंट के भीतर बिजली का एक नेटवर्क तैयार हो जाता है। इसी तकनीक के जरिए सीमेंट को सुपरकैपेसिटर में बदला गया है। प्रयोग के दौरान कई सीमेंट ब्लॉकों को आपस में जोड़कर इतनी ऊर्जा स्टोर की गई कि उससे एक एलईडी बल्ब जलाया जा सका। यानी भविष्य में दीवारें न सिर्फ घर का हिस्सा होंगी बल्कि बिजली का स्रोत भी बन सकती हैं।
10 किलोवॉट-घंटा बिजली स्टोर करने वाला कमरा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से बने सीमेंट से एक कमरे की दीवारें तैयार कर दी जाएं तो वह लगभग 10 किलोवॉट-घंटा बिजली स्टोर कर सकती हैं। यह क्षमता छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और लाइटिंग जरूरतों के लिए पर्याप्त होगी।
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‘जिंदा सीमेंट’ के फायदे
- इससे बिजली स्टोर कर एलईडी लाइट्स और छोटे उपकरण चलाए जा सकेंगे।
- बैक्टीरिया के खत्म हो जाने पर भी इन्हें दोबारा जीवित किया जा सकता है।
- ऊर्जा स्टोर करने की क्षमता वापस लाई जा सकती है।
- सौर पैनल से आने वाली बिजली सीधे दीवारों में स्टोर की जा सकेगी।
- इसमें लिथियम और कोबाल्ट जैसी महंगी धातुओं की जरूरत नहीं होगी।
- बैटरी बदलने की आवश्यकता काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
विज्ञान में नया अध्याय
अब तक सीमेंट को केवल एक निर्जीव और स्थिर पदार्थ माना जाता रहा था, लेकिन इस खोज ने एक नई दिशा दिखाई है। वैज्ञानिक क्यू लुओ के अनुसार, “जब बैक्टीरिया इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं, तो सीमेंट के भीतर बिजली उत्पन्न और संग्रहीत होती है।” इस खोज से ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी क्रांति संभव है। भविष्य में घर, दफ्तर और इमारतें खुद ऊर्जा स्टोर करके पर्यावरण के अनुकूल बन सकेंगी।
