AI Taking over jobs (Source. Freepik)
Mental Health AI Risk: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने दुनियाभर में नौकरीपेशा लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब इसका असर हेल्थ सेक्टर में भी साफ दिखने लगा है। Kaiser Permanente से जुड़े करीब 2400 से ज्यादा मेंटल हेल्थ प्रोवाइडर्स ने AI के खिलाफ 24 घंटे की हड़ताल कर दी।
इन कर्मचारियों का डर साफ है AI कहीं उनकी नौकरियां न छीन ले। हालांकि कंपनी ने भरोसा दिया है कि थैरेपिस्ट को AI से रिप्लेस नहीं किया जाएगा और मेडिकल फैसलों में AI का इस्तेमाल नहीं होगा, लेकिन ग्राउंड लेवल पर बदलाव ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई लाइसेंस प्राप्त क्लीनिकल सोशल वर्कर्स को हटाया जा रहा है और उनकी जगह कम अनुभवी या बिना ट्रेनिंग वाले कर्मचारियों को रखा जा रहा है। थैरेपिस्ट का मानना है कि यह बदलाव इस बात का संकेत है कि कंपनी धीरे-धीरे AI आधारित सिस्टम की ओर बढ़ रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई AI टूल नहीं है जो पूरी तरह से मेंटल हेल्थ केयर को संभाल सके। फिलहाल AI का उपयोग सिर्फ पेपरवर्क और डेटा मैनेजमेंट तक सीमित है।
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI टूल्स इस सेक्टर में एंट्री जरूर कर रहे हैं, लेकिन अभी उन्हें पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। हाल के समय में कई बड़ी कंपनियों ने AI चैटबॉट्स लॉन्च किए हैं, जो मरीजों की शुरुआती जांच में मदद करते हैं। उदाहरण के तौर पर Microsoft Copilot Health को लॉन्च किया गया है। इसके अलावा OpenAI और Perplexity AI भी हेल्थ सेक्टर के लिए नए AI टूल्स पर काम कर रही हैं। यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में हेल्थकेयर इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
AI के बढ़ते प्रभाव से सबसे ज्यादा खतरा उन नौकरियों को है, जहां एक ही काम को बार-बार करना होता है या जहां स्किल लेवल कम होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2035 तक करीब 30 लाख लो-स्किल जॉब्स AI के कारण खत्म हो सकती हैं। ऐसे में मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह चिंता का बड़ा विषय बन गया है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि बदलते समय के साथ खुद को अपडेट रखना बेहद जरूरी है। नई स्किल्स सीखना, टेक्नोलॉजी को समझना और AI के साथ काम करने की क्षमता विकसित करना ही भविष्य में नौकरी सुरक्षित रखने का सबसे बेहतर तरीका होगा।
AI एक तरफ जहां काम को आसान बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ नौकरियों पर खतरे की घंटी भी बजा रहा है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि डरने के बजाय समय के साथ खुद को तैयार किया जाए।