अब फोन नहीं जलेगा, चार्जिंग और गेमिंग में ओवरहीटिंग से छुटकारा दिलाएगी नई देसी तकनीक
Smartphone Overheating: स्मार्टफोन का ओवरहीट होना आम समस्या बन चुका है। ज्यादा गर्मी में फोन चलाना, लगातार गेम खेलना या फिर चार्जिंग के दौरान फोन का जरूरत से ज्यादा गरम हो जाना है।
- Written By: सिमरन सिंह
Smartphone Overheating (Source. Freepik)
Phone Overheating Solutions: आज के समय में स्मार्टफोन का ओवरहीट होना आम समस्या बन चुका है। ज्यादा गर्मी में फोन चलाना, लगातार गेम खेलना या फिर चार्जिंग के दौरान फोन का जरूरत से ज्यादा गरम हो जाना यूजर्स के लिए परेशानी खड़ी कर देता है। कई बार तो फोन स्लो हो जाता है या अपने आप बंद भी हो जाता है। लेकिन अब इस झंझट से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
दरअसल, ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने एक नई थर्मल मैनेजमेंट टेक्नीक विकसित की है, जो थर्मल डायोड की तरह काम करती है और फोन के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी से चलने वाले दूसरे डिवाइसेस को ठंडा रखने में मदद कर सकती है।
आखिर डिवाइसेस ओवरहीट क्यों हो जाते हैं?
मौजूदा स्मार्टफोन और दूसरे पोर्टेबल डिवाइसेस में ओवरहीटिंग की समस्या आम है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पारंपरिक मैटेरियल में थर्मल एनर्जी किसी भी दिशा में फैल सकती है। यानी फोन के प्रोसेसर या बैटरी से निकलने वाली गर्मी वापस फोन के अंदरूनी कंपोनेंट्स तक पहुंच जाती है। इससे टेंपरेचर तेजी से बढ़ता है, फोन की परफॉर्मेंस घटती है और बैटरी पर भी बुरा असर पड़ता है। लंबे समय में यही हीट बैटरी की लाइफ कम कर देती है।
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कैसे काम करती है यह नई टेक्नोलॉजी?
यह नई तकनीक थर्मल रेक्टिफिकेशन के सिद्धांत पर आधारित है। इसके जरिए हीट को कंट्रोल करके सिर्फ एक ही दिशा में भेजा जा सकता है। आसान शब्दों में कहें तो यह सिस्टम गर्मी को आगे की तरफ निकाल देता है और रिवर्स हीट फ्लो को रोक देता है। इससे डिवाइस के अंदर तापमान संतुलित बना रहता है। रिसर्चर्स ने इसके लिए सेमीकंडक्टर मैटेरियल को मैग्नेटिक फील्ड के तहत इस्तेमाल करते हुए एक खास स्ट्रक्चर तैयार किया है। यह स्ट्रक्चर वन-वे हीट पाथवे बनाता है, जिससे गर्मी हीट-सेंसिटिव हिस्सों से बाहर निकल जाती है।
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यूजर्स को क्या-क्या मिलेगा फायदा?
इस तकनीक की मदद से एक नया और ज्यादा असरदार थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम सामने आया है। इससे स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सैटेलाइट और हाई-परफॉर्मेंस एआई सिस्टम्स में ओवरहीटिंग का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। ओवरहीटिंग की वजह से डिवाइस की बैटरी लाइफ और भरोसेमंद परफॉर्मेंस पर जो असर पड़ता है, वह अब कम होगा। इतना ही नहीं, इस तकनीक के आने से डिवाइसेस को ज्यादा गर्म इलाकों में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
