ISRO और NASA का संयुक्त मिशन NISAR, एक नए कदम का देता है इसारा
NISAR को दुनिया का सबसे शक्तिशाली सैटेलाइट माना जा रहा है, जो प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, चक्रवाती तूफान, भूस्खलन और ज्वालामुखी विस्फोट की सक्रियता पर निगरानी करेगा।
- Written By: सिमरन सिंह
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
नवभारत डिजिटल डेस्क. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने अपने संयुक्त मिशन NISAR (NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर राडार) के बारे में एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। नासा ने घोषणा की है कि इस सैटेलाइट को 2025 की शुरुआत में लॉन्च किया जाएगा, और यह पृथ्वी की सतह पर होने वाली सभी प्रमुख प्राकृतिक घटनाओं पर नज़र रखेगा। NISAR को दुनिया का सबसे शक्तिशाली सैटेलाइट माना जा रहा है, जो प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, चक्रवाती तूफान, भूस्खलन और ज्वालामुखी विस्फोट की सक्रियता पर निगरानी करेगा।
NISAR सैटेलाइट कैसे काम करेगा?
NISAR सैटेलाइट की प्रमुख विशेषता इसकी अत्याधुनिक तकनीक है, जो हर 12 दिन में पृथ्वी की सतह की पूरी जांच करेगी। यह सैटेलाइट बर्फ से ढकी जमीन, समुद्री बर्फ, और ग्लेशियरों की गति का भी विश्लेषण करेगा, साथ ही वनस्पति में होने वाले परिवर्तनों को भी ट्रैक करेगा। नासा की वेबसाइट पर इस मिशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है, जिसमें बताया गया है कि यह सैटेलाइट पृथ्वी की सतह के समय के साथ होने वाले परिवर्तनों को रिकॉर्ड करेगा।
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2025 में भारत से लॉन्च होगा NISAR
NISAR सैटेलाइट को भारत के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। इसे GSLV-MK2 रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस सैटेलाइट के S-बैंड को ISRO के अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लिकेशन सेंटर ने तैयार किया है, जबकि L-बैंड और स्पेसक्राफ्ट बस को NASA ने विकसित किया है। यह मिशन पृथ्वी के सतही हलचलों को मापने में अहम भूमिका निभाएगा, जिससे वैज्ञानिकों को प्राकृतिक आपदाओं के बारे में अधिक सटीक जानकारी मिलेगी।
भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट का पूर्वानुमान
NISAR सैटेलाइट से मिलने वाले डाटा से भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और लैंडस्लाइड जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बारे में नई जानकारियां प्राप्त होंगी। हालांकि, यह सैटेलाइट भूकंप कब आएगा, इसका सटीक पूर्वानुमान नहीं करेगा, लेकिन यह उन क्षेत्रों की पहचान करेगा जो भूकंपीय गतिविधियों के लिए सबसे अधिक संवेदनशील हैं। इससे शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि पृथ्वी की सतह के कौन से हिस्से धीरे-धीरे खिसक रहे हैं और कौन से हिस्से अचानक खिसकने का खतरा रखते हैं।
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भारत के लिए विशेष महत्व
ISRO के सॉलिड अर्थ साइंस लीड श्रीजीत के एम ने कहा, “हम विशेष रूप से हिमालयीन क्षेत्रों में रुचि रखते हैं, जहां अतीत में तीव्र भूकंप आए हैं। NISAR हमें इस क्षेत्र के भूकंपीय खतरों के बारे में अभूतपूर्व जानकारी प्रदान करेगा।” इससे भारत को अपने भूकंपीय और अन्य प्राकृतिक खतरों की बेहतर निगरानी करने में मदद मिलेगी।
