मोदी सरकार का 62,500 करोड़ का मेगा प्लान, अब विदेशी नहीं, दुनिया में छाएंगे भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड्स
MPMS Scheme: भारत के स्मार्टफोन बाजार में विदेशी कंपनियों का दबदबा चलता आ रहा था लेकिन अब तस्वीर बदलने वाली है। केंद्र सरकार ने देश के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ाने का प्लान किया है।
- Written By: सिमरन सिंह
MPMS Scheme (Source. Social Media)
Electronics Manufacturing India: भारत के स्मार्टफोन बाजार में लंबे समय से विदेशी कंपनियों का दबदबा चलता आ रहा था लेकिन अब तस्वीर बदलने की तैयारी हो गई है। बता दें कि केंद्र सरकार ने देश के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई ऊंचाई देने के लिए मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद योजना के तहत 62,500 रुपये करोड़ का बड़ा बजट तय किया गया है जिसका उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देना और घरेलू ब्रांड्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
इसके साथ ही सरकार ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए Semicon 2 योजना के तहत 1.26 लाख करोड़ के निवेश को भी मंजूरी दी है। जिसको लेकर माना जा रहा है कि ये दोनों योजनाएं मिलकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने में अहम भूमिका निभाते हुए नजर आएगी।
PLI की जगह अब MPMS
देखा जा रहा है कि नई MPMS Scheme 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई PLI-LSEM (Production Linked Incentive) स्कीम की जगह लेगी। वहीं सरकार अगले पांच सालों में चरणबद्ध तरीके से इस फंड का इस्तेमाल करेगी। इस योजना के तहत भारत में मोबाइल बनाने वाली कंपनियों को बिक्री पर 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। अगर कंपनियां मोबाइल के प्रमुख पार्ट्स और सब-असेंबली देश में ही खरीदती हैं तो उन्हें 1.5% अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं भारतीय ब्रांड्स को डिजाइन और Research & Development (R&D) पर निवेश बढ़ाने के लिए 3% अतिरिक्त इंसेंटिव भी मिलेगा।
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रोजगार बढ़ेगा निर्यात को भी मिलेगा बूस्ट
इस योजना को लेकर सरकार का लक्ष्य है कि देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को लगभग 39 लाख करोड़ तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही मोबाइल एक्सपोर्ट में भी तेज़ी आने की उम्मीद है। वहीं सरकार का कहना है कि MPMS योजना से 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे युवाओं को नई नौकरियां मिलने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश भी बढ़ेगा।
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मेक इन इंडिया को मिलेगी नई रफ्तार
देखा जा रहा था कि पिछले एक दशक में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से बढ़ा है। वहीं वित्त वर्ष 2014-15 के बाद इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन में करीब 7 गुना और इलेक्ट्रॉनिक निर्यात में 11 गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में आज भारत में 100 से ज्यादा मोबाइल निर्माता, कंपोनेंट सप्लायर्स और स्टार्टअप सक्रिय हैं। Foxconn, Tata Electronics और Dixon Technologies जैसी कंपनियां वैश्विक ब्रांड्स के लिए भारत में स्मार्टफोन तैयार कर रही हैं। वहीं Samsung, Oppo और Vivo जैसी कंपनियों की भी भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स मौजूद हैं।
इसके साथ ही सरकार की नई रणनीति का मकसद केवल विदेशी कंपनियों को आकर्षित करना नहीं बल्कि भारतीय ब्रांड्स को भी वैश्विक पहचान दिलाना है। अगर योजना तय लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ती है तो आने वाले सालों में भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन निर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है।
