पृथ्वी पर गिरा मंगल ग्रह का पत्थर, अब 34 करोड़ में होगा नीलाम, वैज्ञानिक नाखुश
खगोलशास्त्रियों और वैज्ञानिकों के जीवन में आसमान से गिरे छोटे-से-छोटे टुकड़े का बहुत मोल होता है। ऐसे ही एक नायाब टुकड़े की अब नीलामी होने जा रही है, जिससे, वैज्ञानिक बड़े ही नाखुश हुए हैं।
- Written By: प्रिया जैस
आसमानी पत्थर (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
वॉशिंगटन:धरती पर अब तक कई ऐसे मौके आए हैं जब आसमान से उल्कापिंड धरती पर गिरे हैं। यह स्थिति बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है। उल्कापिंड के गिरने के बाद उसके अवशेष वैज्ञानिकों के लिए नई खोज का काम करते हैं। आसमान से गिरा ऐसा ही एक टुकड़ा जल्द ही नीलाम होने वाला है। इसके चर्चे अब देश-विदेश में होने लगे है।
पृथ्वी पर मंगल ग्रह का एक बड़ा पत्थर पाया गया है, जो इस महीने के आखिर में ₹34 करोड़ रुपये तक में बिक सकता है। यह मंगल ग्रह का अब तक का सबसे बड़ा टुकड़ा है, जिसे एनडब्ल्यूए 16788 उल्कापिंड के नाम से जाना जाता है। मंगल ग्रह के इस टुकड़े की नीलामी 16 जुलाई को रखी गई है। इसकी नीलामी न्यूयॉर्क के सोथबी नाम के मशहूर नीलामीघर ऑफिस में आयोजित की जा रही है।
उल्कापिंड की विशेषता क्या हैं ?
दरअसल, ये कहानी शुरू होती है नवंबर 2023 से, नाइजर के अगाडेज इलाके में एक वैज्ञानिक को अनोखा पत्थर मिला। इसका वजन 24 किलो था। यह मंगल ग्रह से गिरने वाले उल्कापिंडों की तुलना में बहुत बड़ा है। इस चट्टान की कीमत 17 करोड़ से 34 करोड़ रुपये (50,000 से 70,000 पाउंड) के बीच तय की गई है। अब तक पृथ्वी पर 77 हजार उल्कापिंड गिरे, जिसमें मंगल ग्रह के केवल 400 उल्कापिंड हैं। इसीलिए इसकी नीलामी इतनी खास है।
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नीलामी से वैज्ञानिक नाखुश
आसमान से गिरा छोटे-से-छोटा टुकड़ा वैज्ञानिकों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं होता। यही वजह है कि इस नीलामी से कई वैज्ञानिक नाखुश है। वैज्ञानिक नहीं चाहते कि यह अनमोल मंगल ग्रह का पत्थर नीलाम किया जाए। एक तरफ जहां खगोलशास्त्री और कुछ लोग इस उल्कापिंड की नीलामी को लेकर काफी उत्साहित है और बेसब्री से इसके नीलामी का इंतजार कर रहे हैं।
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वहीं दूसरी ओर कुछ वैज्ञानिक इस दुर्लभ चट्टान की नीलामी पर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में प्रोफेसर स्टीव ब्रुसेट ने दुख और अपनी नाराजगी जाहीर की है। उन्होंने कहा – यह शर्म की बात होगी अगर यह उल्कापिंड सार्वजनिक अध्ययन और आनंद के लिए संग्रहालय में प्रदर्शित होने के बजाय किसी अमीर व्यक्ति की तिजोरी में समा जाए।
