Light pollution is a big threat to astronomy (सौ. AI)
नवभारत टेक डेस्क: हवा, पानी और ध्वनि के प्रदूषण के बाद अब रोशनी से होने वाला प्रदूषण यानी लाइट पॉल्यूशन एक नया खतरा बनकर उभरा है। यह प्रदूषण न केवल इंसानों बल्कि खगोल विज्ञान के लिए भी गंभीर चुनौती पेश कर रहा है। खासतौर पर यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेट्री (ESO) की वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) के लिए यह समस्या बढ़ रही है।
धरती पर आर्टिफिशियल लाइट का बढ़ता उपयोग लाइट पॉल्यूशन का मुख्य कारण है। यह प्रदूषण इतना अधिक बढ़ गया है कि रात के आकाश में तारों और सौर मंडल की घटनाओं को देखना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, लाइट पॉल्यूशन की वजह से वेरी लार्ज टेलीस्कोप की क्षमता 30% तक घट सकती है, जो खगोलशास्त्रियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।
वेरी लार्ज टेलीस्कोप, जो चिली के अटाकामा रेगिस्तान में स्थित है, को आकाशीय घटनाओं का अध्ययन करने के लिए विशेष रूप से स्थापित किया गया था। लेकिन अब, एक नवीकरणीय हाइड्रोजन संयंत्र बनाने की योजना से इसके संचालन में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
अमेरिकी कंपनी AES एनर्जी द्वारा प्रस्तावित यह प्रोजेक्ट 3,021 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा। इसमें सौर फार्म, पवन फार्म, बैटरी भंडारण प्रणाली और हाइड्रोजन उत्पादन की सुविधाएं शामिल हैं। यह संयंत्र VLT से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर होगा, जिससे प्रकाश प्रदूषण बढ़ेगा। ESO के अनुसार, यह संयंत्र 20,000 लोगों वाले शहर के बराबर रोशनी उत्पन्न कर सकता है।
लाइट पॉल्यूशन के कारण वेधशाला को बेहद धुंधली आकाशगंगाओं को देखने की क्षमता का 30% नुकसान हो सकता है। ESO के महानिदेशक जेवियर बार्कोन्स का कहना है कि इससे आकाश की चमक में 10% की वृद्धि होगी। खगोल वैज्ञानिकों को अपनी दूरबीनों की क्षमता बढ़ाने के लिए और अधिक उन्नत तकनीक और भारी निवेश की आवश्यकता होगी।
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1990 के दशक में 350 मिलियन डॉलर की लागत से बनाए गए VLT में चार 27-फुट चौड़ी दूरबीनें हैं, जो मिलकर ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करती हैं। यह हाइड्रोजन परियोजना के कारण अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग करने में असमर्थ हो सकती है।