फर्जी परिवहन ऐप से देशभर में ठगी, केरल साइबर पुलिस ने वाराणसी से गिरोह दबोचा

Fake Parivahan App: केरल की कोच्चि साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन फ्रॉड का भंडाफोड़ करते हुए उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक ठग गिरोह को गिरफ्तार किया है।
फर्जी परिवहन ऐप से देशभर में ठगी, केरल साइबर पुलिस ने वाराणसी से गिरोह दबोचा
कैसे किया बड़ा धोखा। (सौ. Freepik)
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Fake Parivahan App: केरल की कोच्चि साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन फ्रॉड का भंडाफोड़ करते हुए उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक ठग गिरोह को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देशभर में लोगों को फर्जी Parivahan मोबाइल ऐप के ज़रिए ठग रहा था। पुलिस ने रविवार को इस स्कैम की पुष्टि की।

कैसे दिया जाता था ऑनलाइन धोखा?

गिरोह व्हाट्सएप पर फर्जी APK फाइल्स भेजता था। इन मैसेजों में लिखा होता था कि आपके वाहन पर चालान लंबित हैं और उसे चुकाने के लिए दिए गए लिंक से ऐप डाउनलोड करें। लेकिन यह ऐप नकली होता था, जो इंस्टॉल होते ही यूजर के मोबाइल से व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी चुरा लेता था।

मास्टरमाइंड निकला नाबालिग

पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस स्कैम को तकनीकी रूप देने वाला एक 16 वर्षीय लड़का था। उसने गिरोह के एक सदस्य के कहने पर यह ऐप डेवलप किया। गिरोह Telegram बॉट्स की मदद से वाहनों की जानकारी जुटाता था और फिर संबंधित नंबरों पर धोखाधड़ी वाले मैसेज भेजे जाते थे।

केरल के व्यक्ति से ₹85,000 की ठगी

यह मामला तब सामने आया जब एर्नाकुलम जिले के एक नागरिक ने National Cyber Reporting Platform (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि उसे ₹85,000 की चपत लगी है।

पुलिस को क्या मिला सबूतों से?

जांच में आरोपियों के मोबाइल से 2700 से ज्यादा वाहन मालिकों की जानकारी बरामद हुई है, जो केरल, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के थे। ठोस डिजिटल सबूतों के आधार पर गिरोह की गिरफ्तारी की गई।

कैसे बचें ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड से?

  • व्हाट्सएप या एसएमएस से आए लिंक पर क्लिक न करें।
  • ऐप केवल Google Play Store या Apple App Store से ही इंस्टॉल करें।
  • फोन को नियमित रूप से रीस्टार्ट करें।
  • कोई भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक को सूचना दें।
  • साइबर फ्रॉड की शिकायत www.cybercrime.gov.in पर करें।
  • हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं।
  • SacharSathi पोर्टल से भी शिकायत दर्ज और ट्रैक की जा सकती है।
  • बैंक अधिकारी बनकर आए कॉल/मैसेज से सावधान रहें, केवल आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से संपर्क करें।
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