

TRAI On Jio And Airtel: भारत के दूरसंचार नियामक टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने Reliance Jio और Bharti Airtel से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उन्होंने अपने सबसे सस्ते 1GB डेली डेटा वाले एंट्री-लेवल मोबाइल प्लान क्यों बंद किए। जानकारी के मुताबिक, इन सस्ते पैक पर कम आय वर्ग के लोग अपनी बुनियादी इंटरनेट ज़रूरतें पूरी करते थे।
सूत्रों के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DoT) ने भी TRAI से मामले की समीक्षा कर रिपोर्ट देने को कहा है। एक अधिकारी ने कहा, "TRAI एक नियामक है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक होने पर हस्तक्षेप करने की पूरी शक्ति रखता है।"
Jio ने अपने जवाब में कहा कि उसने कुछ पैक्स को बाजार विश्लेषण के आधार पर रीपोज़िशन किया है और अब ये केवल ऑफलाइन स्टोर्स पर उपलब्ध हैं। Aritel ने 20 अगस्त से ₹249 वाले प्लान को बंद कर दिया। कंपनी का कहना है कि यह फैसला ग्राहकों को ज्यादा वैल्यू देने और बाजार की जरूरतों को देखते हुए लिया गया। AIrtel ने कहा, "₹299 का नया प्लान ज्यादा वैधता और बेहतर ऑफरिंग के साथ आता है, जो उपभोक्ताओं के लिए किफायती है।"
19 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों कंपनियों ने ₹249 वाले 1GB डेली डेटा प्लान को अपनी वेबसाइट से हटाया। Jio का प्लान 28 दिनों और Airtel का 24 दिनों की वैधता के साथ आता था। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाने की रणनीति है। JM Financial के अनुसार, इस बदलाव से Jio का ARPU 6-7% और Airtel का 4-4.5% तक बढ़ सकता है।
नई दरों के अनुसार, Airtel ₹299 में 28 दिनों के लिए 1GB/दिन डेटा दे रहा है। Jio ₹299 में 1.5GB/दिन डेटा ऑफर कर रहा है। हालांकि, इस बदलाव से ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के यूजर्स की जेब पर असर पड़ा है। कर्नाटक से सांसद ने संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लिखे पत्र में किसानों की मुश्किलों का जिक्र किया है।
UBS रिसर्च के मुताबिक, भारत में एंट्री-लेवल टेलीकॉम प्लान प्रति व्यक्ति GDP का 1.24% हैं, जो थाईलैंड, मलेशिया, चीन और इंडोनेशिया जैसे बाजारों से महंगे हैं। बावजूद इसके, भारत अब भी दुनिया के सबसे सस्ते डेटा वाले देशों में गिना जाता है। सिंधिया ने फरवरी में संसद को बताया था कि 2014 में डेटा की कीमत ₹270 प्रति GB थी, जो अब घटकर केवल ₹9.70 प्रति GB रह गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एंट्री-लेवल प्लान हटाना कंपनियों की प्राइसिंग पावर को दर्शाता है और आने वाले 1-2 साल में 5G डेटा मॉनेटाइजेशन की राह खोल सकता है।