RBI का बड़ा कदम: अब कर्ज न चुकाने पर लॉक हो जाएगा आपका फोन
Mobile Phone Lock Rule: RBI उपभोक्ता लोन और रिकवरी प्रक्रिया को लेकर नया नियम लागू करने की तैयारी में है। लोन चुकाने में विफल रहने पर कर्जदाता उसके मोबाइल फोन को दूर से ही लॉक कर सकेंगे।
- Written By: सिमरन सिंह
RBI करने वाला है बड़ा फैसला। (सौ. AI)
RBI New Rule 2025 Phone Lock Loan Recovery: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) उपभोक्ता लोन और रिकवरी प्रक्रिया को लेकर नया नियम लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि कोई उधारकर्ता समय पर लोन चुकाने में विफल रहता है, तो कर्जदाता उसके मोबाइल फोन को दूर से ही लॉक कर सकेंगे। यह कदम कर्जदाताओं की ताकत बढ़ाने की दिशा में माना जा रहा है, हालांकि उपभोक्ता अधिकारों को लेकर चिंताएं भी तेज हो गई हैं।
क्यों ज़रूरी है यह नियम?
होम क्रेडिट फाइनेंस की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स खासतौर पर मोबाइल फोन एक तिहाई से ज्यादा मामलों में लोन पर खरीदे जाते हैं। वहीं, टेलीकॉम रेगुलेटर के आंकड़े बताते हैं कि देश में 1.4 बिलियन आबादी के मुकाबले 1.16 बिलियन से अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं। ऐसे में लोन रिकवरी को लेकर सख्त कदम उठाना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
फोन होगा लॉक, लेकिन डेटा रहेगा सुरक्षित
सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष RBI ने कर्जदाताओं को डिफॉल्ट करने वाले ग्राहकों के फोन लॉक करने से रोकने का निर्देश दिया था। हालांकि अब नई व्यवस्था के तहत लोन जारी करते समय उधारकर्ता के फोन में विशेष ऐप इंस्टॉल कराया जाएगा, जो डिफॉल्ट की स्थिति में फोन लॉक करने की सुविधा देगा।
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RBI की योजना दो स्तरों पर काम करेगी:
- कर्जदाता को लोन रिकवरी का मजबूत अधिकार मिलना।
- ग्राहकों का निजी डेटा सुरक्षित रहना।
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, RBI जल्द ही फेयर प्रैक्टिस कोड अपडेट करते हुए फोन-लॉकिंग मैकेनिज्म पर दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
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किन कंपनियों को होगा फायदा?
अगर यह नियम लागू होता है, तो बजाज फाइनेंस, DMI फाइनेंस और चोलमंडलम फाइनेंस जैसी कंपनियों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। इन कंपनियों का बड़ा हिस्सा उपभोक्ता प्रोडक्ट्स पर छोटे लोन देने में है। क्रेडिट ब्यूरो CRIF हाईमार्क के अनुसार, 1 लाख रुपये से कम के लोन सबसे अधिक जोखिम भरे माने जाते हैं। ऐसे में फोन-लॉकिंग मैकेनिज्म लोन रिकवरी को आसान बना सकता है और डिफॉल्ट दर घटा सकता है।
ध्यान दें
RBI का यह कदम जहां वित्तीय संस्थानों को मजबूत करेगा, वहीं उपभोक्ताओं के अधिकारों और डिजिटल आज़ादी पर बहस भी तेज होगी। अब यह देखना बाकी है कि नया नियम लागू होने पर संतुलन किस तरह कायम किया जाएगा।
