अब नहीं चलेगा डिजिटल अरेस्ट स्कैम, सरकार का बड़ा एक्शन, WhatsApp पर ठगों की आईडी होगी तुरंत ब्लॉक
Digital Arrest Scam के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। अब WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर स्कैम में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया है।
- Written By: सिमरन सिंह
WhatsApp Digital Arrest (Source. Design)
WhatsApp Fraud: डिजिटल अरेस्ट स्कैम के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। अब WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर स्कैम में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया है। इस फैसले से करोड़ों यूजर्स को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन लोगों को जो रोजाना ऑनलाइन ठगी के डर में जी रहे हैं।
WhatsApp के जरिए हो रही थी ठगी
आज के समय में WhatsApp एक बेहद लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप है, जिसका भारत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसी लोकप्रियता का फायदा उठाकर साइबर ठग लोगों को निशाना बना रहे थे। स्कैमर्स WhatsApp कॉल, वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए लोगों को फंसाते थे और खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर डराते थे।
I4C की रिपोर्ट पर हुआ एक्शन
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली साइबर एजेंसी इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) की रिपोर्ट के आधार पर यह सख्त कदम उठाया गया है। दरअसल, स्कैमर्स बार-बार नए अकाउंट बना लेते हैं, इसलिए अब अकाउंट नहीं बल्कि डिवाइस लेवल पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है।
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क्या होता है डिवाइस ID?
डिवाइस ID किसी भी मोबाइल या गैजेट की एक यूनिक पहचान होती है, जैसे आधार कार्ड हर व्यक्ति की पहचान होता है। इसके कई प्रकार होते हैं:
- IMEI नंबर: मोबाइल नेटवर्क में फोन की पहचान के लिए
- MAC एड्रेस: Wi-Fi और नेटवर्क कनेक्शन के लिए
- डिवाइस सीरियल नंबर: कंपनी द्वारा दिया गया यूनिक नंबर
- Advertising ID: ऐप्स और विज्ञापन से जुड़ी पहचान
क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस या एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे फर्जी आरोप लगाकर गिरफ्तारी की धमकी देते हैं और कहते हैं कि जांच के लिए तुरंत सहयोग करें। इसके बाद पीड़ित को वीडियो कॉल पर “नजरबंद” रहने के लिए कहा जाता है, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। पिछले दो सालों में इस तरह के स्कैम से हजारों लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं।
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कैसे करें खुद का बचाव?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- अनजान नंबर से आए कॉल या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें
- किसी भी फर्जी आरोप से घबराएं नहीं
- याद रखें, “ऑनलाइन गिरफ्तारी जैसा कुछ नहीं होता”
- तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन पर संपर्क करें
- OTP और बैंक डिटेल्स से रहें दूर
- स्कैमर्स जांच के नाम पर आपकी बैंक डिटेल्स, OTP और पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। ऐसी किसी भी मांग को तुरंत मना करें।
अगर आपके साथ ऐसी घटना होती है, तो तुरंत संचार साथी पोर्टल या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
