(कॉन्सेप्ट फोटो)
New Guidelines For AI Content: सोशल मीडिया जगत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मंगलवार को आईटी नियमों (IT Rules 2021) में बड़े संशोधनों की घोषणा करते हुए आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब X (ट्विटर), यूट्यूब, स्नैपचैट और फेसबुक जैसे सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को अपने यहां शेयर किए जाने वाले हर एआई (AI) कंटेंट पर अनिवार्य रूप से लेबल लगाना होगा।
सरकार का यह फैसला डीपफेक वीडियो और तस्वीरों के जरिए फैलने वाली भ्रामक जानकारी (Misinformation) और चुनावी धांधली जैसी गंभीर समस्याओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।
नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अगर कोई एआई-जनरेटेड कंटेंट पोस्ट किया जाता है, तो उस पर साफ तौर पर यह लिखना होगा कि यह कंटेट असली नहीं बल्कि एआई द्वारा जनरेटेड है। इसके अलावा, सरकार ने डीपफेक के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए आदेश दिया है कि किसी भी आपत्तिजनक डीपफेक कंटेंट की रिपोर्ट होने पर उसे महज 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। मंत्रालय द्वारा जारी यह संशोधित नियम 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे।
गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण बदलाव का मसौदा सरकार ने 22 अक्टूबर 2025 को ही सार्वजनिक कर दिया था, जिसे अब अंतिम रूप देकर लागू किया जा रहा है ताकि डिजिटल स्पेस को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके।
केंद्र सरकार द्वारा जारी नए आईटी नियम 3(3) के तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय कर दी गई है। नए प्रावधानों के अनुसार, जो भी प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स को ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ यानी एआई आधारित कंटेंट बनाने या साझा करने की सुविधा देंगे, उन्हें हर ऐसी सामग्री पर स्पष्ट और प्रमुख ‘लेबल’ लगाना अनिवार्य होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह लेबल केवल दिखावे के लिए नहीं होगा, बल्कि कंटेंट के साथ एक परमानेंट और यूनिक ‘मेटाडेटा’ या ‘आइडेंटिफायर’ एम्बेड करना होगा, जिसे कोई भी यूजर या प्लेटफॉर्म बदल, छिपा या डिलीट नहीं कर सकेगा। यह तकनीक एआई कंटेंट को अंत तक ट्रेस करने में मदद करेगी।
नियमों में लेबल के आकार और समय को लेकर भी कड़े मानक तय किए गए हैं। विजुअल या वीडियो कंटेंट के मामले में एआई लेबल को स्क्रीन के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से को कवर करना होगा, ताकि दर्शक उसे आसानी से देख सकें। वहीं, ऑडियो कंटेंट की स्थिति में क्लिप शुरू होने के पहले 10 प्रतिशत समय के भीतर ही यह सुनाई देना चाहिए कि यह आवाज एआई जनरेटेड है।
इसके साथ ही, प्लेटफॉर्म्स को अब ऐसे उन्नत तकनीकी तंत्र विकसित करने होंगे जो किसी भी फाइल के अपलोड होने से पहले ही यह पहचान सकें कि वह असली है या एआई द्वारा निर्मित। यह कदम डिजिटल स्पेस में पारदर्शिता लाने और डीपफेक के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है।
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यूजर्स अब फेक कंटेंट आसानी से पहचान सकेंगे, मिसइनफॉर्मेशन कम होगी। लेकिन क्रिएटर्स को एक्स्ट्रा स्टेप्स करने पड़ेंगे, जैसे लेबल लगाना। इंडस्ट्री के लिए चैलेंज ये होगा कि उन्हें मेटाडेटा और वेरिफिकेशन के लिए टेक इन्वेस्टमेंट करना होगा, जो ऑपरेशंस को थोड़ा महंगा कर सकता है।