अब झट से पहचान जाएंगे डीपफेक और एआई जनरेटेड इमेज, गूगल का ये टूल करेगा दूध का दूध पानी का पानी
गूगल ने कंटेंट क्रेडेंशियल्स नाम के टेक्नोलॉजी स्टैंडर्ड का ज्यादा सुरक्षित वर्जन लॉन्च किया है। इस नई तकनीक को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाया गया है। जिससे कोई भी किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा। इस टूल का इस्तेमाल गूगल के जरिए एआई इमेज को लेबल करने के लिए किया जाएगा।
- Written By: मृणाल पाठक
गूगल (सौजन्यः सोशल मीडिया)
टेक डेस्क, नवभारत: इस समय देश-दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। कई लोग इसका यूज अपने सहूलियत के लिए करते हैं, तो कई लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। जिसकी वजह से डीपफेक के मामले काफी तेजी से बढ़ गए हैं। ऐसे में इन मामलों से निजात पाने के लिए अब गूगल ने नया टूल लॉन्च कर दिया है।
गूगल ने कंटेंट क्रेडेंशियल्स नाम के टेक्नोलॉजी स्टैंडर्ड का ज्यादा सुरक्षित वर्जन लॉन्च किया है। इस नई तकनीक को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाया गया है। जिससे कोई भी किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा। इस टूल का इस्तेमाल गूगल के जरिए एआई इमेज को लेबल करने के लिए किया जाएगा।
गूगल की मानें तो गूगल इमेज, लेंस और सर्किल टू सर्च पर दिखने वाली इमेज में यूजर्स की सारी जानकारी कंटेंट क्रेडेंशियल्स में मिल जाएगी। इसका मतलब यह है कि यूजर किसी भी फोटो के About this image सेक्शन में जाकर देख सकेंगे कि इमेज किसी तरह के एआई टूल की मदद से बनाई गई है या फिर उसे एडिट किया गया है।
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बता दें कि इसके साथ ही गूगल अपने विज्ञापन सिस्टम को C2PA मेटाडेटा से जोड़ने की भी योजना बना रहा है। यह डेटा भविष्य में कंपनी की नीतियों के बारे में जानकारी देगा। साथ ही गूगल यूट्यूब पर भी यूजर्स को C2PA की जानकारी देने का काम कर रहा है। जिसकी मदद से यूजर्स को यह जानकारी हासिल होगी कि वीडियो कैमरे से शूट किया गया है या डिजिटली तैयार किया गया है। इस नए टूल की मदद से अब यूजर्स को काफी आसानी होगी।
गौरतलब है कि एआई जनरेटेड फोटो इस समय काफी ट्रेंड में है। इन तस्वीरों को प्रॉम्प्ट के माध्यम से बनाया जाता है, जो काफी हद तक ओरिजिनल भी लगते हैं। इन फोटो की वजह से कई डीपफेक के मामले बढ़ गए हैं। लोग इन सब चीजों की वजह से काफी परेशान हैं। ऐसे में गुगल का यह नया टूल लोगों के काफी काम आने वाला है।
