

Smart Meter Benefits And Drawbacks: आपके घर में भी Smart Meter का इस्तेमाल होता है और आपको डर है कि इसके बाद बिजली का बिल अचानक बढ़ जाएगा तो पहले पूरी बात समझ लेना जरूरी है। बता दें कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली की प्रति यूनिट सरकारी दर अपने आप नहीं बढ़ती। इसका मुख्य काम बिजली की खपत को ज्यादा सटीक तरीके से रिकॉर्ड करना और उसका डेटा उपलब्ध कराना है। लेकिन स्मार्ट मीटर के बाद कुछ लोगों को बिल ज्यादा दिखाई दे सकता है जिसकी वजह समझना जरूरी है।
बता दें कि पुराने मीटर में कई बार रीडिंग अनुमान के आधार पर दर्ज होने या रीडिंग में अंतर की समस्या हो सकती थी। इसके मुकाबले स्मार्ट मीटर बिजली की खपत का डेटा डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड करता है और उपलब्ध सिस्टम के जरिए इसे भेज सकता है। वहीं इसका एक बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ता कई मामलों में मोबाइल ऐप के जरिए अपनी रोजाना बिजली खपत पर नजर रख सकते हैं। जिससे महीने के आखिर में बिल देखकर यह पता लगाने के बजाय कि बिजली ज्यादा क्यों खर्च हुई खपत को पहले से ट्रैक किया जाना काफी आसान हो जाएगा।
जानकारी में बताया गया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद 1 यूनिट बिजली की दर अपने आप नहीं बदलती है। बिजली की कीमत आपके राज्य के बिजली विभाग, लागू टैरिफ और खपत के स्लैब पर निर्भर करती है। जिसको अलग-अलग राज्यों और उपभोक्ता श्रेणियों में अगर देखा गया है। साथ ही कुछ मामलों में ज्यादा यूनिट खपत करने पर ऊंचे टैरिफ स्लैब की दर लागू कि जाती है। इसलिए बिल बढ़ने का कारण सिर्फ स्मार्ट मीटर को मान लेना सही नहीं माना जाना चाहिए।
अगर आपको ऐसा लग रहा है कि नया मीटर पुराने मीटर की तुलना में ज्यादा बिल दिखा रहा है तो इसका कारण दर कि सटीकता है। इसके अलावा AC, गीजर, हीटर, पानी की मोटर और दूसरे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने पर भी बिल बढ़ सकता है। वहीं कई मामलों में पुराना बकाया या एरियर नए बिलिंग सिस्टम में जुड़ने की स्थिति में भी कुल रकम ज्यादा दिखाई दे सकती है। इसलिए बिल आने पर पिछले महीनों की खपत और स्मार्ट मीटर ऐप के डेटा की तुलना करना ग्राहकों के लिए उपयोगी और समझने के लिए आसान विकल्प होता है।
जैसा कि सभी को पता है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर में मोबाइल रिचार्ज की तरह पहले बैलेंस डालना पड़ता है। बैलेंस खत्म होने पर बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। साथ ही डेटा अपडेट के लिए नेटवर्क या संचार व्यवस्था पर निर्भरता रहती है। ऐसे में स्मार्ट मीटर लगाने से पहले अपने स्थानीय बिजली विभाग के नियम जरूर जांचें कि वह आपके राज्य में किस तरह से है। वहीं अलग-अलग क्षेत्रों में मीटर बदलने और उपभोक्ता की जिम्मेदारियों से जुड़े प्रावधान अलग हो सकते हैं। केवल यह मान लेना सही नहीं है कि स्मार्ट मीटर लगते ही बिजली महंगी हो जाएगी।