हिंदी में Claude AI बन जाता है ज्यादा दोस्ताना, अंग्रेजी में वही सवाल पूछने पर बदल जाता है अंदाज
Claude AI Hindi: क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही AI से एक जैसा सवाल अलग-अलग भाषाओं में पूछने पर जवाब भी बदल सकता है? Anthropic की नई रिसर्च ने यही चौंकाने वाला खुलासा किया है।
- Written By: सिमरन सिंह
Claude AI (Source. Claude)
Anthropic Claude AI: क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही AI से एक जैसा सवाल अलग-अलग भाषाओं में पूछने पर जवाब भी बदल सकता है? Anthropic की नई रिसर्च ने यही चौंकाने वाला खुलासा किया है। बता दें कि कंपनी के AI मॉडल Claude पर हुई स्टडी में पाया गया कि भाषा बदलते ही उसका व्यवहार भी बदल जाता है। रिसर्च में देखा गया कि हिंदी में पूछे गए सवालों का जवाब Claude ज्यादा गर्मजोशी, विनम्रता और उत्साह बढ़ाने वाले अंदाज में देता है जबकि अंग्रेजी में उसका जवाब कहीं अधिक विश्लेषणात्मक और गंभीर होता है।
3 लाख से ज्यादा बातचीत का किया गया विश्लेषण
बता दें कि एंथ्रोपिक ने अपने Claude मॉडल्स Sonnet 4.6, Opus 4.6 और Opus 4.7 के साथ 20 सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली भाषाओं में हुई 3 लाख से ज्यादा बातचीत का विश्लेषण किया। इसमें सलाह, राय और फीडबैक जैसे ऐसे सवाल शामिल थे जिनका कोई एक तय जवाब नहीं होता। इस रिसर्च का मकसद यह समझना था कि अलग-अलग भाषाओं में AI अपने यूजर्स के साथ किस तरह संवाद करता है और क्या भाषा उसके जवाब देने के तरीके को प्रभावित करती है।
हिंदी में ज्यादा मजेदार और मोटिवेशनल बन जाता है Claude
इस रिसर्च के होने पर जो नतीजे सामने आए वो बताते हैं कि हिंदी और अरबी में Claude सबसे ज्यादा आत्मीय और सकारात्मक अंदाज में जवाब देता है। हिंदी में यह सिर्फ सवाल का उत्तर नहीं देता बल्कि बातचीत को सहज बनाने के लिए हल्का-फुल्का मजाक भी करता है। इतना ही नहीं, कई बार बिना पूछे ही यूजर का हौसला बढ़ाता है उसके मूड को समझने की कोशिश करता है और बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित भी करता है। जिसका सीधा मतलब है कि हिंदी में Claude का व्यवहार एक दोस्ताना गाइड जैसा महसूस होता है।
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अंग्रेजी में बदल जाता है पूरा अंदाज
दूसरी तरफ अंग्रेजी में Claude कहीं अधिक सतर्क और तथ्य आधारित जवाब देता है। रिसर्च में देखा गया कि अंग्रेजी में यह धारणाओं को चुनौती देता है अपने जवाबों में सबूत जोड़ने की कोशिश करता है और जरूरत पड़ने पर बिना कहे अपनी गलती भी सुधार लेता है। वहीं सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस अंतर को देखकर खुद एंथ्रोपिक भी हैरान है। कंपनी का कहना है कि वह यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग भाषाओं में AI का व्यवहार इतना अलग क्यों हो जाता है। माना जा रहा है कि इस रिसर्च से भविष्य में ऐसे AI सिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी जो दुनिया की विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
