नवभारत संपादकीय: क्या AI मानवता पर हावी हो रही है? UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की गंभीर चेतावनी

AI Risks Warning: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर मानव नियंत्रण जरूरी है। अनियंत्रित AI का विकास भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
Navbharat Editorial: Is AI overpowering humanity? UN Secretary-General António Guterres's grave warning.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)
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UN AI Safety Warning: आप संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने आगाह किया र्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े खतरे को लेकर है कि क्या मानवता एआई तकनीक की प्रकृति व प्रभाव को संचालित व प्रभावित करेगी या फिर एआई को अपने बेछूट तरीके से विकसित होने के लिए छोड़ देगी? उन्होंने चेतावनी दी कि एआई को अनियंत्रित तरीके से विकसित होने देना खतरनाक है।

कुछ सीमा रेखाओं को पार नहीं किया जाना चाहिए, तकनीक के प्रभाव में आकर नियंत्रित होने की बजाय मानव बुद्धि को तकनीक पर नियंत्रण रखना चाहिए। गुटेरस ने कहा कि एआई बड़ी तेजी से मानवता पर नियंत्रण पाने में लगी है। मिसाल के तौर पर इंटरनेट को 1 अरब लोगों तक पहुंचने में 15 वर्ष लगे जबकि एआई उन तक केवल 2 वर्षों में पहुंच गई।

AI का अनियंत्रित विस्तार बन सकता है वैश्विक खतरा

एआई सिस्टम अब किसी निर्देश की प्रतीक्षा नहीं करते। वह खुद ही अपना कोड लिखते और ऑनलाइन एक्टिव हो जाते हैं। उसमें इंसान की निगरानी का विकल्प कम होता जा रहा है। मशीन इंसान के लिए निर्णय लेने लगे तो यह उचित नहीं होगा।

मानवी संस्थाएं इसके लिए तैयार नहीं हैं। एआई से दूसरा खतरा यह है कि कुछ देशों और कंपनियों के हाथों में शक्ति या अधिकारों का केंद्रीकरण होजाएगा। अधिकांश राष्ट्र उन निर्णयों पर अपनी राय नहीं दे सकेंगे, जो उनका भविष्य निर्धारित करेंगे।

इससे विश्व में असमानता और बढ़ेगी। एआई को लेकर तीसरा सबसे बड़ा खतरा यह है कि मशीन से निकली हुई झूठी बात भी सत्य मानी जाएगी और प्रमाणयुक्त साक्ष्य को भी झूठा माना जाएगा। इससे सूचना तंत्र की प्रामाणिकता को भारी क्षति पहुंचेगी।

AI पर अंधा भरोसा पड़ सकता है भारी

एआई पर ज्यादा भरोसा करना महंगा पड़ेगा। यूएन महासचिव ने जिन शंकाओं को व्यक्त किया है, उन पर विचार करना होगा। एआई पहले ही नौकरियों के लिए संकट पैदा कर रही है। मानव की बुद्धि की बजाय यदि प्रौद्योगिकी सत्य की नई परिभाषा गढ़ने लग जाए तो क्या होगा? अदालती फैसलों के लिए जज एआई की मदद ले सकते हैं, लेकिन फैसला करने का काम उस पर नहीं छोड़ सकते। एआई से हासिल की गई पुराने मामलों की मिसाल (प्रीसीडेंटस) पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसकी स्वयं पड़ताल करनी होगी, क्योंकि एआई गुमराह भी कर सकती है।

AI का संतुलित इस्तेमाल ही भविष्य की कुंजी

तकनीक का दुरुपयोग रोकना होगा और ध्यान रखना होगा कि एआई इंसान की बुद्धि पर हावी न होने पाए, निरुद्देश्य व मनमाने तरीके से एआई का इस्तेमाल करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। विश्व आर्थिक मंच पर भी कुछ वर्ष पूर्व नेताओं ने अनियंत्रित स्वचालितकरण पर चिंता जताई थी जो मानव के रोजगार छीन रहा है।

जिन देशों में आबादी कम है और घरों व कारखानों के लिए पर्याप्त कर्मचारी या मानव बल नहीं मिलता, वहां रोबोटिक्स व एआई का इस्तेमाल संदर्भ रखता है। यदि एआई को खुली छूट दे दी गई और मानव उस पर पूरी तरह निर्भर होने लगा तो उसकी स्वयं की बुद्धि और विवेक को जंग लग जाएगा।

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