क्विक कॉमर्स का बढ़ता बाजार, भारी छूट के बाद क्या अब कंपनियां करेंगी वसूली?
छोटे शहरों तक भी अपनी पहुंच बना रही हैं। ग्राहक आकर्षित करने के लिए ये कंपनियां भारी डिस्काउंट और ऑफर्स दे रही हैं, जिससे उनका कैश बर्न (Cash Burn) तेजी से बढ़ रहा है।
- Written By: सिमरन सिंह
King Commerce क्या है जाने सब कुछ। (सौ. X)
नवभारत टेक डेस्क: भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर तेजी से उभर रहा है। इस क्षेत्र की तीन प्रमुख कंपनियां— BlinkIt, Instamart और Zepto— न केवल बड़े शहरों में बल्कि छोटे शहरों तक भी अपनी पहुंच बना रही हैं। ग्राहक आकर्षित करने के लिए ये कंपनियां भारी डिस्काउंट और ऑफर्स दे रही हैं, जिससे उनका कैश बर्न (Cash Burn) तेजी से बढ़ रहा है।
कितना बढ़ चुका है कैश बर्न?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Zomato की BlinkIt, Swiggy की Instamart और Zepto का हर महीने का कैश बर्न 1,300 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें Zomato और Swiggy पहले से ही शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां हैं, जबकि Zepto जल्द ही अपना IPO लाने की तैयारी में है।
भारी फंडिंग से बढ़ा कैश बर्न
इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने अपने बाजार विस्तार और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी मात्रा में फंडिंग जुटाई है।
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- BlinkIt, Instamart और Zepto ने अब तक 3 अरब डॉलर (करीब 25,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा की फंडिंग हासिल की है।
- कैश बर्न का सीधा असर कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी और शेयर बाजार में उनकी परफॉर्मेंस पर पड़ रहा है।
कैश बर्न से Zepto को फायदा
Zepto, जो इस सेगमेंट में सबसे नई कंपनी है, ने तेजी से कैश बर्न किया है और इसका उसे फायदा भी मिला है।
- BofA रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, Zepto के मासिक सक्रिय यूजर्स (Monthly Active Users) की संख्या 4.3 करोड़ तक पहुंच गई है।
- BlinkIt इस मामले में पीछे रह गई, जिसके मासिक यूजर्स 3.9 करोड़ दर्ज किए गए हैं।
क्विक कॉमर्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
अब इस सेगमेंट में कई और कंपनियां बिग बास्केट नाउ, फ्लिपकार्ट मिनट्स, अमेजन नाउ और मिंत्रा नाउ जैसी दिग्गज कंपनियां भी उतर चुकी हैं। इससे कैश बर्न और प्रतिस्पर्धा दोनों और बढ़ गई हैं।
क्या अब कंपनियां छूट खत्म कर देंगी?
पहले भी देखा गया है कि ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियां पहले ग्राहकों को लुभाने के लिए भारी डिस्काउंट, फ्री डिलीवरी और कैशबैक देती हैं। लेकिन जैसे ही ये कंपनियां बाजार में मजबूत स्थिति बना लेती हैं और शेयर मार्केट में लिस्ट होती हैं, वे अपने घाटे की भरपाई शुरू कर देती हैं।
- डिलीवरी चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस और सब्सक्रिप्शन फीस जैसी नीतियां पहले भी अपनाई गई हैं।
- संभावना है कि क्विक कॉमर्स कंपनियां भी जल्द ही डिस्काउंट कम करेंगी और ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलना शुरू करेंगी।
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ध्यान देने वाली बात
क्विक कॉमर्स सेक्टर में भारी निवेश और प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनियां अभी कैश बर्न कर रही हैं, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चल सकता। आने वाले समय में छूट और ऑफर्स में कटौती हो सकती है, जिससे ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
