नई दिल्ली: देश में कई राज्य है और उन सभी राज्यों की अलग-अलग विशेषता है, ऐसे में आज है महाराष्ट्र के प्रमुख त्योहारों में से एक यानी बैल पोला। इस बार आज यानी भाद्रपद मास की अमावस्या 26 अगस्त, शुक्रवार को यह पर्व है। बता दें कि भाद्रपद मास की अमावस्या की अंतिम तिथि शनिवार दोपहर 1 बजे है। इस दिन कुशग्रहणी अमावस्या, शनिश्चरी अमावस्या, बैल पोला (Bail Pola 2022) और पिठौरी अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। वैसे तो इस त्यौहार को खास कर बैल पोला के नाम से ही लोग जानते हैं।
आपको बता दें कि ये बैल पोला त्योहार मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के कुछ स्थान, कर्नाटक और महाराष्ट्र में मुख्य रूप से मनाया जाता है। इस दिन बैलों की पूजा की जाती है। इसे बैल पोला और पोला पर्व माना जाना जाता है। आइए आज बैल पोला के इस पर्व पर जानते है इससे जुड़ी कुछ खास बाते…
जैसा की हमने आपको बताया बैल पोला का यह त्योहार वैसे तो देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में इसका महत्व काफी ज्यादा है, यहां बैल पोला बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि विदर्भ में बैल पोला को मोठा पोला भी कहते हैं साथ ही इसके दुसरे दिन होने वाले त्योहार को तान्हा पोला कहा जाता है। पूरा विश्व जानता है कि भारत एक कृषिप्रधान देश है और ज्यादातर किसान खेती करने के लिए बैलों का प्रयोग करते हैं। इसलिए सभी किसान पशुओं की पूजा करके उन्हें धन्यवाद देते हैं, आज के दिन बैलों का सम्मान किया जाता है, उन्हें अच्छी तरह सजाया जाता है और इतना ही नहीं बल्कि उन्हें अच्छे -अच्छे पकवान भी खिलाएं जाते है।
सबसे पहले बैल पोला पर किसान अपने बैलों की गले से रस्सी निकालकर उनकी तेल मालिश करते हैं। इसके बाद उन्हें अच्छे से नहला कर तैयार किया जाता है। कई स्थानों पर बैलों को रंग बिरंगे कपड़े और जेवर के साथ फूलों की माला पहनाई जाती है। इसके बाद बैलों को बाजरा से बनी खिचड़ी खिलाई जाती है। सभी एक एक स्थान पर इकट्ठा होकर बैलों का जुलूस निकालते हैं और उत्सव मनाते हैं। इस दिन घरों में विशेष तरह के पकवान जैसे पूरन पोली, गुझिया आदि चीजें बनाई जाती हैं। इस तरह बड़े उत्साह के साथ यह पर्व महाराष्ट्र सहित दश के कई राज्यों में मनाया जाता है।
जानकारी हो कि भाद्रपद मास की अमावस्या तक किसान अपनी फसल बो चुके होते हैं। आज भी बैलों की सहायता से ही किसान खेत जोतते है। जब किसान फसल बोकर निश्चित हो जाता है तब वो बैलों का धन्यवाद देने के लिए ये पर्व मनाता है। वैसे तो देखने और सुनने में ये बात भले ही बहुत छोटी लगे, लेकिन इसके पीछे एक लाइफ मैनेजमेंट सूत्र छिपा है वो ये है कि जिन भी पशु व उपकरणों से हमारा जीवन-यापन हो रहा है, वे सभी धन्यवाद के पात्र हैं। ये भावना हमारे अंदर विनम्रता का भाव भी पैदा करता है। इस लिए यह त्यौहार मनाया जाता है।