जयंती विशेष: वो बल्लेबाज जिसने 1 से लेकर 11 नंबर तक की है बल्लेबाजी, बस इस एक कारण से हो गए थे बदनाम
Vinoo Mankad Birthday Special: वीनू मांकड़ ने 29 साल की में 22 जून 1946 में इंग्लैंड दौरे से उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था। इसके बाद तो उनके प्रदर्शन की चर्चा शुरू हो गई। उन्होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किया।
- Written By: उज्जवल सिन्हा
वीनू मांकड़ (फोटो-सोशल मीडिया)
स्पोर्ट्स डेस्क: वीनू मांकड़ का जन्म आज के दिन 12 अप्रैल 1917 को हुआ था। वीनू मांकड़ का पूरा नाम मुलवंतराय हिम्मतलाल मांकड़ है। वीनू मांकड़ का 21 अगस्त 1978 को 61 वर्ष की आयु में बॉम्बे में निधन हो गया। वो भारत के अब तक के सबसे महान ऑलराउंडरों में से एक थे। उन्होंने उस दौर में सभी उपलब्धि हासिल कर ली थी। वो उस समय के ऐसे पहले खिलाड़ी थे, जिन्होंने एक मैच में ओपनिंग बैटिंग भी की और उसके बाद बॉलिंग में भी पहला ओवर डाला।
वीनू मांकड़ पहले ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने 1 नंबर से लेकर 11 नंबर तक बल्लेबाजी की थी। वो एक ही मैच में पहले शतक बनाया और उसके बाद उसी मैच में जीरो पर भी आउट हो गए। वीनू मांकड़ ने 23 टेस्ट में 1000 रन भी पूरे कर लिए थे और उसके साथ 100 विकेट भी ले लिए थे। वो ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी थे। वो भारत को पहली टेस्ट जीत दिलाने में नायक भी रहे थे। हालांकि इन सबसे अलावा को वो अपने रन आउट के तरीके के लिए भी जाने जाते हैं।
वीनू मांकड़ का डेब्यू
वीनू मांकड़ ने 29 साल की में 22 जून 1946 में इंग्लैंड दौरे से उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था। इस दौरे से उन्होंने खुद का प्रतिभा की झलक दिखाई और टीम इंडिया की जगह पक्की की। चार महीने तक चले इस दौरे पर भारत ने 29 मैच खेले। जिसमें वीनू मांकड़ ने 129 विकेट लिए और 1000 रन से ज्यादा बनाए। वे इकलौते भारतीय हैं जिन्होंने इंग्लैंड में ऐसा प्रदर्शन किया। साथ ही उनके बाद कोई भी विदेशी खिलाड़ी इंग्लैंड में इस तरह की उपलब्धि हासिल नहीं कर सका है।
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वीनू मांकड़ का प्रदर्शन
वीनू मांकड़ ने भारत के लिए कुल 44 टेस्ट खेले और 31.47 की औसत से 2109 रन बनाने के साथ ही उन्होंने 162 विकेट भी चटकाए। वीनू मांकड़ एक सीरीज में दो दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज भी बने थे। उनके नाम टेस्ट में पांच शतक और 6 अर्धशतक हैं। वहीं गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 8 बार एक पारी में पांच विकेट लिए। वीनू मांकड़ ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 782 विकेट चटकाए हैं। वहीं अगर रन की बात करें तो उन्होंने 11591 रन बनाए हैं।
भारत की पहली टेस्ट जीत के नायक
भारतीय टीम को पहली टेस्ट जीत दिलाने में वीनू मांकड़ का बड़ा योगदान रहा था। 1952 में जब भारतीय टीम ने टेस्ट में पहली जीत दर्ज की तो उस मैच में वीनू ने कुल 12 विकेट लिए थे। उसके बाद उन्होंने इसी साल इंग्लैंड के दौरे पर ओपनिंग करते हुए लॉर्ड्स में 72 और 184 रनों की पारी खेली थी। इस मुकाबले में उन्होंने पांच विकेट भी चटकाए थे। लेकिन भारत यह मुकाबला जीत नहीं सका। इसी मुकाबले में वीनू मांकड़ ने बॉलिंग और बैटिंग दोनों में ओपनिंग की।
ओपनिंग में की थी 413 रनों की साझेदारी
1955-56 में वीनू मांकड़ ने पंकज रॉय के साथ मिलकर न्यूजीलैंड के खिलाफ मद्रास टेस्ट में पहले विकेट के लिए 413 रन जोड़े। इस दौरान वीनू ने 231 रन बनाए। ओपनिंग में सबसे बड़ी साझेदारी का यह रिकॉर्ड 52 साल तक रहा। 2008 में दक्षिण अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ और नील मैकेंजी ने इस रिकॉर्ड को अपने नाम किया। वीनू बाएं हाथ के स्पिनर थे वे काफी तेजी से ओवर पूरा कर देते थे। कहते हैं कि वे लगभग एक मिनट में छह गेंद फेंक देते थे। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 25 बार एक पारी में 40 से ज्यादा ओवर किए। उनकी गेंदों पर तीन बार बल्लेबाज हिट विकेट हुए दुनियाभर के गेंदबाजों में इस तरह से बल्लेबाजों को आउट करने में वीनू दूसरे नंबर पर हैं।
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कैसे पड़ा मांकड़िंग का नाम
1947-48 में जब भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद अमरनाथ ने कहा था कि अगर वीनू नहीं होता तो ऑस्ट्रेलिया वाले 1000 रन बनाते। इस दौरे पर मांकड़ एक विवाद में भी फंसे। दरअसल दूसरे टेस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के बिल ब्राउन को रन आउट किया। यह आम रन आउट नहीं था। जब वीनू बॉलिंग कर रहे थे तब ब्राउन गेंद डालने से पहले ही रन के लिए निकल रहे थे। पहले तो वीनू ने उन्हें चेतावनी दी लेकिन जब वे नहीं माने तो उन्होंने गेंद फेंकने से पहले ब्राउन को रन आउट कर दिया। इसके बाद इरह के रन आउट को मांकड़िंग के नाम दिया गया।
