पेरिस में टूटा सपना, LA में होगा पूरा! विनेश फोगाट का संन्यास से यू-टर्न, ओलंपिक पर होगी नजरें
Vinesh Phogat: विनेश फोगाट ने संन्यास का फैसला बदलते हुए दोबारा कुश्ती में वापसी का ऐलान किया है। पेरिस के विवाद के बाद अब उनका लक्ष्य 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में मेडल जीतना है।
- Written By: उज्जवल सिन्हा
विनेश फोगाट (फोटो-सोशल मीडिया)
Vinesh Phogat Retirement U-Turn: भारतीय पहलवान व हरियाणा के जुलाना की विधायक विनेश फोगाट ने संन्यास से वापसी कर ली है। उन्होंने पेरिस ओलंपिक के बाद कुश्ती से संन्यास ले लिया था। विनेश फोगाट पेरिस ओलंपिक के फाइनल में पहुंच गई थी। उन्होंने दुनिया की नंबर एक रेसलर को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। लेकिन फाइनल से पहले उनका वजन निर्धारित कैटेगरी से ज्यादा था। जिसके बाद उन्हें डिस्क्वालिफाई कर दिया। जिसके बाद उन्होंने संन्यास का ऐलान कर दिया था।
भारत लौटने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस जॉइन कर लिया। हरियाणा के जुलाना से उन्होंने बीजेपी के योगेश कुमार को हराकर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। चुनावी मैदान में उतरने के बाद अब फिर से विनेश कुश्ती के अखाड़े में वापसी करने को तैयार है। विनेश फोगाट 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक में उतरना चाहती हैं। संन्यास की वापसी की जानकारी विनेश ने सोशल मीडिया के जरिए दी है।
pic.twitter.com/2sQRvFju8m — Vinesh Phogat (@Phogat_Vinesh) December 12, 2025
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विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि लोग लगातार पूछते रहे कि क्या पेरिस मेरे करियर का अंत था। लंबे समय तक मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था। मुझे मैट से, दबाव से, उम्मीदों से, यहां तक कि अपने ही सपनों से दूर जाने की जरूरत थी। कई सालों बाद पहली बार मैंने खुद को सांस लेने दिया। अपने सफर के बोझ, उतार-चढ़ाव, दिल टूटने और उन रूपों को समझने का समय मिला जिन्हें दुनिया कभी नहीं देख पाई। और इसी सोच-विचार में मुझे सच्चाई मिली, मुझे यह खेल अब भी उतना ही पसंद है। मैं अब भी लड़ना चाहती हूं।
उन्होंने आगे लिखा कि उस खामोशी में मुझे वह चीज मिली जिसे मैं भूल सी गई थी। ‘मेरे अंदर की आग कभी खत्म नहीं हुई।’ बस थकान और शोर ने उसे ढक दिया था। अनुशासन, रूटीन, लड़ाई… ये सब मेरे भीतर रचा-बसा है। चाहे मैं कितनी भी दूर चली जाऊं, मेरा एक हिस्सा हमेशा मैट पर ही रहता है। इसलिए मैं वापस आ रही हूं, LA 2028 की ओर, एक निडर दिल और अटूट जज़्बे के साथ और इस बार मैं अकेली नहीं हूं। मेरा बेटा मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा इस सफर में मेरा छोटा चीयरलीडर बनकर मेरे साथ है।
