योगेश्वर दत्त (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Olympic Roadmap India: कुश्ती में ओलंपिक पदक विजेता, पद्मश्री व पूर्व भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त ने सिर्फ मौजूदा हालात नहीं गिनाए, बल्कि भारत को खेलों में शीर्ष पर पहुंचाने का एक स्पष्ट ‘रोडमैप’ सामने रखा। उनका फोकस साफ था- अगर सिस्टम सही दिशा में काम करे, तो भारत का ओलंपिक भविष्य बदल सकता है। वे वर्धा में आयोजित होने वाली समरसता दौड़ के लिए नागपुर पहुंचे थे।
शुक्रवार को उन्होंने पत्रकारों से चर्चा कर देश के खेल और ओलंपिक (Olympic) में भारत के प्रदर्शन को लेकर बात की। योगेश्वर दत्त ने कहा कि भारत के खेलों की नींव गांवों में है, लेकिन वहीं सबसे ज्यादा कमी भी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि 12-16 साल के खिलाड़ियों को अगर सही समय पर पोषण, कोचिंग और मेडिकल सपोर्ट नहीं मिला तो टैलेंट वहीं खत्म हो जाता है, उनके मुताबिक, सीनियर लेवल पर पैसा खर्च करना आसान है, लेकिन असली निवेश जूनियर स्तर पर होना चाहिए, ज्यादातर बड़े खिलाड़ी साधारण और गरीब परिवारों से निकलते हैं, जहां संसाधन कम होते हैं लेकिन जुनून सबसे ज्यादा होता है। यही खिलाड़ी भारत को ओलंपिक (Olympic) में नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
उन्होंने साफ किया कि भारत को सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिताओं की जरूरत है। प्रैक्टिस में खिलाड़ी सीखता है, लेकिन असली कमियां मुकाबले में सामने आती हैं। इसी वजह से ‘खेलो इंडिया’ और नेशनल चैंपियनशिप जैसे प्लेटफॉर्म जरूरी हैं, क्योंकि ये खिलाड़ियों को मैच प्रेशर में ढालते हैं।
योगेश्वर दत्त ने माना कि विदेशी कोचों ने भारतीय कुश्ती को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि बड़ी कमियां हर कोई सुधार लेता है, लेकिन छोटी-छोटी तकनीकी गलतिया ही मेडल और हार के बीच फर्क बनती हैं, और इन्हें सुधारने में विदेशी कोचों की भूमिका अहम रही है। उन्होंने इसे ‘इंडियन मेहनत व इंटरनेशनल टेक्निक’ का सफल मॉडल बताया।
मैराथन को उन्होंने ‘एकता की दौड़’ बताया, उनका कहना था कि जब हजारों लोग बिना किसी जाति-धर्म के एक साथ दौड़ते हैं, तो वह सिर्फ खेल नहीं होता, बल्कि एक मजबूत समाज और देश की तस्वीर होती है।
दत्त ने 2036 ओलंपिक भारत में कराने की उम्मीद जताते हुए कहा कि यह सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि देश के खेल ढांचे को बदलने का मौका होगा। उनका लक्ष्य साफ है- ‘उस वक्त भारत सिर्फ मेजबान नहीं, बल्कि टॉप-10 में शामिल देश होना चाहिए।’
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उन्होंने खिलाड़ियों को सबसे बड़ा मंत्र दिया- प्रेशर से भागों मत, उसे अपनाओ। उनका कहना था कि जब खिलाड़ी मैदान में उतरता है तो पूरे देश की उम्मीदें उसके साथ होती है। यही दवाव उसे बेहतर बनने के लिए मजबूर करता है। अगर थोडा डर नहीं होगा, तो मेहनत भी पूरी नहीं होगी।’
योगेश्वर दत्त ने भरोसा जताया कि भारत अब गोल्ड मेडल से ज्यादा दूर है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में कुश्ती में लगातार मेडल आ रहे हैं, और अब वक्त आ गया है जब खिलाड़ी सिर्फ भाग लेने नहीं, बल्कि जीतने के इरादे से उतरे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे नए और अनजान खिलाड़ी भी ओलंपिक में जाकर मेडल जीत रहे हैं, यह इस बात का संकेत है कि भारत का भविष्य मजबूत है।