इंडियन सुपर लीग (फोटो-सोशल मीडिया)
ISL 2025-26 to start February 14: भारतीय फुटबॉल में पिछले छह महीनों से जारी अनिश्चितता का अंत करते हुए खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को घोषणा की कि इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का आयोजन 14 फरवरी से किया जाएगा। वाणिज्यिक साझेदार न मिलने के कारण स्थगित हुई इस लीग में अब मोहन बागान और ईस्ट बंगाल समेत सभी 14 क्लब हिस्सा लेंगे।
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) मुख्यालय में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) और आईएसएल क्लबों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद मांडविया ने मीडिया को बताया कि सरकार, एआईएफएफ और सभी क्लबों की सहमति से यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि अदालतों में चल रहे विवादों के चलते जो अनिश्चितता बनी हुई थी, उस पर अब विराम लग गया है।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि सितंबर में शुरू होने वाली आईएसएल अब फरवरी में आयोजित की जाएगी और सभी क्लब भाग लेंगे। इसी के साथ वित्तीय मॉडल को लेकर विरोध के कारण रुकी आई लीग भी उसी समय शुरू होगी, जिसमें 11 टीमें हिस्सा लेंगी।
एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे ने जानकारी दी कि आईएसएल के संचालन के लिए एक संचालन परिषद बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो लीग से जुड़े सभी वाणिज्यिक फैसले लेगा। आईएसएल में 14 टीमों के बीच 91 मैच एक चरण में घरेलू और बाहर (होम और अवे) आधार पर खेले जाएंगे। मैचों के आयोजन स्थलों का फैसला क्लब एआईएफएफ के साथ मिलकर करेंगे। चौबे ने यह भी बताया कि आई लीग में 11 टीमों के बीच कुल 55 मैच खेले जाएंगे और इसका आयोजन भी आईएसएल के साथ ही होगा।
आईएसएल के संचालन के लिए 25 करोड़ रुपये का एक वित्तीय पूल तैयार किया गया है। इसमें 10 प्रतिशत राशि एआईएफएफ, 15 प्रतिशत क्लब और 30 प्रतिशत वाणिज्यिक साझेदार वहन करेंगे। जब तक वाणिज्यिक साझेदार नहीं मिल जाता, तब तक एआईएफएफ कुल 40 प्रतिशत खर्च उठाएगा। इस दौरान एआईएफएफ का कुल योगदान 14 करोड़ रुपये होगा, जिसमें 10 करोड़ आईएसएल और 3.2 करोड़ रुपये आई लीग के लिए शामिल हैं। इसके अलावा इंडियन विमेंस लीग (IWL) का पूरा खर्च भी एआईएफएफ वहन करेगा। जरूरत पड़ने पर सरकार से सहयोग लिया जाएगा।
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आईएसएल 2025–26 का आयोजन उस समय अधर में लटक गया था जब एआईएफएफ के वाणिज्यिक साझेदार रिलायंस समूह की एफएसडीएल ने ‘मास्टर्स राइट एग्रीमेंट’ (MRA) को लेकर अनिश्चितता के चलते जुलाई में लीग को स्थगित कर दिया था। यह समझौता आठ दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था और बातचीत भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति की निगरानी में वाणिज्यिक अधिकारों के लिए निविदा जारी की गई, लेकिन कोई खरीदार सामने नहीं आया।
इस गतिरोध से खिलाड़ी भी प्रभावित हुए थे। सुनील छेत्री, गुरप्रीत सिंह संधू और संदेश झिंगन जैसे सीनियर खिलाड़ियों समेत कई विदेशी फुटबॉलरों ने फीफा से हस्तक्षेप की मांग की थी। अनिश्चितता के चलते कई विदेशी खिलाड़ी लीग छोड़कर चले गए और मैनचेस्टर सिटी की मालिकाना हक वाली सिटी फुटबॉल ग्रुप ने मुंबई सिटी एफसी में अपनी हिस्सेदारी भी छोड़ दी थी।