गेंद-बल्ले की टकराहट से लेकर भावनाओं की गूंज तक, विवेक राजदान की जुबां पर सिर्फ क्रिकेट
Vivek Razdan: विवेक राजदान एक ऐसा क्रिकेटर जिसने क्रिकेट को बहुत ही सीमित स्तर पर खेला, लेकिन इसे बड़े स्तर पर जिया। जी हां एक ऐसा क्रिकेट कमेंटेटर जिन्होंने हर हारी पारी को भी जीत में बदल दिया।
- Written By: गीतांजली शर्मा
विवेक राजदान, पूर्व क्रिकेटर, कमेंटेटर (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
FORMER CRICKETER VIVEK RAZDAN: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हुए। अपने बल्ले और बॉल के दमपर जिन्होंने खेल के मैदान में खुद के साथ-साथ देश के सितारें भी बुलंद कर दिए। लेकिन इसी लिस्ट में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने क्रिकेट से संन्यास तो बहुत जल्द ले लिया, लेकिन इस खेल को पूरी तरह से अपना जीवन समर्पित कर दिया। एक ऐसे ही क्रिकेट कमेंटेटर हैं विवेक राजदान, जिन्होंने अपने शब्दों की ताकत से करोड़ों दिलों को जीत लिया।
विवेक राजदान एक ऐसी शख्सियत जिन्होंने अपना पूरा जीवन ही क्रिकेट के खेल में झोंक दिया। इनका जन्म 25 अगस्त, 1969 को हुआ। राजदान भारतीय टीम के लिए एक तेज गेंदबाज के तौर पर खेले। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा न खिंच पाया, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने दिल्ली की ओर से अपनी गहरी छाप छोड़ी। इसके बाद भी, असली जादू तो तब शुरू हुआ जब उन्होंने माइक्रोफोन हाथ में लिया।
विवेक राजदान के बोले शब्द सीधे दिल को छूते हैं
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विवेक राजदान की शब्दों और आवाज ने क्रिकेट को नया रूप दिया है। हिंदी कमेंट्री में उनका अंदाज कुछ ऐसा है कि, दर्शक खुद को सीधे मैदान से जोड़े बिना नहीं रह पाते। इनके शब्दों के साहित्यिक रंग ही इन्हें दूसरों से अलग और खास बनाते हैं। उनकी कमेंट्री सिर्फ खेल को बयां नहीं कर रही होती, बल्कि एक कविता, एक कथा और कभी-कभी हारी हुई जीवन की दिशा बदलती नजर आती है।
अपने शब्दों से लगाए चौके-छक्के
दिल्ली से निकलकर भारतीय क्रिकेट टीम तक अपनी जगह बनाने वाले विवेक ने खेल से बहुत जल्दी ही संन्यास ले लिया। संन्यास के बाद अपने शब्दों से चौके-छक्के लगाए और अपनी कमेंट्री से क्रिकेट को एक नया रूप दे दिया। हाल के दिनों में भारत और इंग्लैंड के बीच हुए टेस्ट सीरीज को विवेक राजदान की आइकोनिक कमेंट्री ने और भी दिलचस्प और दमदार बना दिया। नाजुक पलों में उन्होंने श्रोताओं को अपने संयम भरे शब्दों से बांधकर रखा और जोशीले पलों को ऐसे बयां किया कि, सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए।
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क्रिकेट से कमेंट्री तक का नायाब सफर
भारतीय टीम के लिए इन्होंने दो टेस्ट और तीन वनडे मैच ही खेले। उन्होंने 29 फर्स्ट क्लास मैच भी खेले। भले ही यह एक सीमित करियर रहा। लेकिन जब इनका यह नायाब सफर क्रिकेट से शुरू होकर कमेंट्री तक पहुंचा, तो राजदान ने साबित कर दिया कि मैदान चाहे बल्ले और गेंद का हो या शब्दों और आवाज का, यह हर मैदान के सच्चे खिलाड़ी थे, हैं और रहेंगे।
