राष्ट्रमंडल खेल 2022 (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
भारत ने लगभग दो दशकों बाद एक बार फिर से राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) की मेजबानी का सपना साकार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को भारत ने औपचारिक तौर पर 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए अपनी आधिकारिक बोली प्रस्तुत की। यह प्रस्ताव भारतीय राष्ट्रमंडल खेल संघ और गुजरात सरकार के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के समक्ष रखा। इस बोली में अहमदाबाद को मेजबान शहर के रूप में शामिल किया गया है। खास बात यह है कि 2030 का संस्करण राष्ट्रमंडल खेलों के शताब्दी वर्ष के तौर पर आयोजित होगा, ऐसे में भारत इस अवसर को अपने लिए ऐतिहासिक बनाने की कोशिश कर रहा है।
गुजरात के खेल मंत्री हर्ष संघवी ने इस अवसर पर कहा कि भारत की खेल भावना ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की प्राचीन भारतीय विचारधारा पर आधारित होगी, जिसका अर्थ है – “विश्व एक परिवार है।” उनके मुताबिक, यह आयोजन वैश्विक एकता, सहयोग और मानवीय जुड़ाव को एक नई पहचान देगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ‘अतिथि देवो भव’ की भावना इन खेलों में आने वाले सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों और दर्शकों के स्वागत की मुख्य आधारशिला होगी।
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और महान एथलीट पीटी उषा ने इस बोली को पूरे देश की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद में प्रस्तावित ये खेल भारत की खेल क्षमताओं और मजबूत बुनियादी ढांचे को दुनिया के सामने रखने का मौका देंगे। साथ ही यह आयोजन मित्रता, सम्मान और समावेशिता जैसे मूल्यों को भी प्रदर्शित करेगा, जो भारतीय खेल संस्कृति की आत्मा हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शताब्दी वर्ष का यह महोत्सव न सिर्फ राष्ट्रमंडल परिवार के लिए यादगार होगा, बल्कि भारत की नई पीढ़ी को खेलों के माध्यम से सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा भी देगा।
2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भारत के उस दीर्घकालिक विजन का हिस्सा है, जिसके तहत देश खुद को एक अग्रणी खेल राष्ट्र के रूप में स्थापित करना चाहता है। इससे न केवल बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी की क्षमता मजबूत होगी, बल्कि खेल संबंधी बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में व्यापक निवेश का मार्ग भी प्रशस्त होगा। अहमदाबाद को मेजबान शहर के रूप में प्रस्तावित करने के पीछे यह सोच है कि यहां आधुनिक खेल परिसरों, परिवहन, आवास और तकनीकी संसाधनों का तेजी से विकास हो रहा है, जो एक वैश्विक खेल आयोजन के लिए जरूरी है।
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इस बोली के साथ भारत ने यह साफ संकेत दिया है कि वह खेलों के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति और मजबूत करना चाहता है। अगर 2030 के राष्ट्रमंडल खेल भारत को मिलते हैं, तो यह न केवल देश की खेल यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा बल्कि भारत को खेलों की महाशक्ति बनने की दिशा में भी आगे ले जाएगा।
एजेंसी इनपुट के साथ