भारत बनाम श्रीलंका (फोटो-सोशल मीडिया)
T20 World Cup 2014 India vs Sri Lanka Final Recall: ढाका के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में खेला गया टी20 वर्ल्ड कप 2014 का फाइनल भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे भावुक और चर्चा का विषय रहने वाले मैचों में से एक है। पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहने वाली महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया फाइनल में श्रीलंका के सामने रन बनाने के लिए तरसते दिखे। कम रन के कारण भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने न केवल करोड़ों भारतीयों का दिल तोड़ा, बल्कि एक बड़े खिलाड़ी के करियर पर भी सवालिया निशान लगा दिए।
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। रोहित शर्मा ने 26 गेंदों में 29 रनों की बेहद धीमी पारी खेली, जिसने पावरप्ले में रन गति को रोक दिया। हालांकि, दूसरे छोर पर विराट कोहली अपने चरम पर थे। कोहली ने 58 गेंदों में 77 रनों की साहसी पारी खेली, जिसमें 5 चौके और 4 छक्के शामिल थे। लेकिन विडंबना यह रही कि कोहली को दूसरे छोर से किसी भी बल्लेबाज का साथ नहीं मिला।
मैच का सबसे टर्निंग पॉइंट युवराज सिंह की बल्लेबाजी रही। 2007 और 2011 वर्ल्ड कप के नायक रहे युवराज इस मैच में पूरी तरह संघर्ष करते नजर आए। उन्होंने 21 गेंदें खेलीं और मात्र 11 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 52.38 का रहा, जो टी20 फाइनल जैसे बड़े मंच पर घातक साबित हुआ। युवराज न तो स्ट्राइक रोटेट कर पा रहे थे और न ही बड़े शॉट लगा पा रहे थे। उनकी इस धीमी पारी के कारण सेट बल्लेबाज विराट कोहली नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़े रहने को मजबूर हो गए और अंतिम ओवरों में भारत को जो मोमेंटम मिलना चाहिए था, वह खत्म हो गया।
श्रीलंका के कप्तान लसिथ मलिंगा और नुवान कुलसेकरा ने अंतिम 4 ओवरों में मास्टरक्लास गेंदबाजी का प्रदर्शन किया। मलिंगा की सटीक यॉर्कर और कुलसेकरा की विविधताओं के सामने भारतीय बल्लेबाज रन बनाने के लिए तरस गए। अंतिम 4 ओवरों में भारत मुश्किल से 19 रन ही जोड़ सका। श्रीलंका की इस अनुशासित गेंदबाजी ने भारत को महज 130/4 के मामूली स्कोर पर रोक दिया। फाइनल जैसे बड़े दबाव वाले मैच में 130 रनों का लक्ष्य कभी भी बचाव के लायक नहीं माना जाता।
131 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम ने सधी हुई शुरुआत की। हालांकि भारत ने बीच में कुछ विकेट लेकर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन कुमार संगकारा का अनुभव भारी पड़ा। अपना आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे संगकारा ने नाबाद 52 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। श्रीलंका ने 17.5 ओवरों में ही लक्ष्य हासिल कर लिया और 6 विकेट से जीत दर्ज कर अपना पहला टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीता।
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2014 की वह हार यह सिखाती है कि बड़े मैचों में केवल एक खिलाड़ी (विराट कोहली) के प्रदर्शन से खिताब नहीं जीते जाते। पूरी बल्लेबाजी यूनिट का योगदान और स्ट्राइक रोटेशन अनिवार्य है। युवराज सिंह की वह पारी आज भी खेल के निर्दयी स्वरूप की याद दिलाती है, जहाँ एक दिन का खराब प्रदर्शन आपके पुराने सभी महान योगदानों पर भारी पड़ जाता है। आज जब टीम इंडिया भविष्य के फाइनल की तैयारी करती है, तो 2014 की ये गलतियाँ एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में देखी जाती हैं।