वीनू मांकड़ (फोटो-सोशल मीडिया)
Vinoo Mankad Birth Anniversary: भारतीय क्रिकेट इतिहास में वीनू मांकड़ का नाम एक महान ऑलराउंडर के रूप में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्हें न केवल अपने दौर का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी माना जाता है, बल्कि भारतीय टेस्ट क्रिकेट की नींव मजबूत करने वाले अहम स्तंभों में भी उनकी गिनती होती है।
वीनू मांकड़ का जन्म 12 अप्रैल 1917 को जामनगर में हुआ था। उनका पूरा नाम मुलवंतराय हिम्मतलाल ‘वीनू’ मांकड़ था। वह दाएं हाथ के भरोसेमंद बल्लेबाज और बाएं हाथ के बेहतरीन स्पिन गेंदबाज थे। उन्होंने जून 1946 में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इंग्लैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया।
भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच 1932 में खेला था, लेकिन पहली जीत हासिल करने में टीम को करीब 20 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। यह ऐतिहासिक पल 1952 में आया, जब भारत ने चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में इंग्लैंड को हराकर अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की। इस जीत के नायक वीनू मांकड़ ही थे।
इस मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 266 रन बनाए, जिसमें मांकड़ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 8 विकेट हासिल किए। इसके जवाब में भारत ने 9 विकेट पर 457 रन बनाकर पारी घोषित की और 191 रन की बढ़त ली। दूसरी पारी में इंग्लैंड की टीम 183 रन पर सिमट गई, जहां मांकड़ ने 4 और विकेट झटके। इस तरह उन्होंने मैच में कुल 12 विकेट लेकर भारत को पारी और 8 रन से ऐतिहासिक जीत दिलाई।
वीनू मांकड़ भारत के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एक से लेकर ग्यारह नंबर तक बल्लेबाजी की है। भारत के लिए रवि शास्त्री और फारूख इंजीनियर ने भी 1 से 10 नंबर तक बल्लेबाजी की है, लेकिन 11 नंबर तक सिर्फ मांकड़ ने ही बल्लेबाजी की है।
अपने टेस्ट करियर (1946–1959) में मांकड़ ने 44 मैच खेले और 2,109 रन बनाए, जिसमें 5 शतक और 6 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 231 रन रहा। गेंदबाजी में उन्होंने 162 विकेट लिए और 8 बार एक पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा किया। घरेलू क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 233 प्रथम श्रेणी मैचों में 11,591 रन बनाए और 782 विकेट झटके। वे भारत के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने बल्लेबाजी क्रम में 1 से लेकर 11 तक हर स्थान पर बल्लेबाजी की है।
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वीनू मांकड़ का नाम क्रिकेट के एक चर्चित नियम “मांकड़िंग” से भी जुड़ा है। 1947 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बिल ब्राउन को क्रीज से बाहर निकलने पर रन आउट किया था। हालांकि उन्होंने पहले चेतावनी भी दी थी, फिर भी यह घटना लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही।
भारत सरकार ने उनके योगदान को सम्मान देते हुए 1973 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। साथ ही, बीसीसीआई उनके नाम पर अंडर-19 स्तर का प्रतिष्ठित वनडे टूर्नामेंट आयोजित करती है। 21 अगस्त 1978 को 61 वर्ष की आयु में वीनू मांकड़ का निधन हो गया, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान आज भी अमर है। वे सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के इतिहास के ऐसे नायक हैं, जिन्होंने टीम को जीत का रास्ता दिखाया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।