
उस्मान ख्वाजा (फोटो-सोशल मीडिया)
Usman Khawaja To Retire From International Cricket: पाकिस्तान में जन्मे ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) में रविवार से शुरू होने वाले पांचवें और अंतिम एशेज टेस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की है। यह टेस्ट उनके करियर का 88वां और आखिरी मुकाबला होगा और खास बात यह कि इसी मैदान से उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी करियर की शुरुआत की थी।
ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले मुस्लिम क्रिकेटर ख्वाजा ने संन्यास की घोषणा के साथ अपने करियर के दौरान झेली गई ‘नस्लीय रूढ़िवादिता’ पर भी खुलकर बात की। 39 वर्षीय ख्वाजा ने कहा कि उनकी पाकिस्तानी और मुस्लिम पृष्ठभूमि के कारण उनके साथ “अभी भी थोड़ा अलग व्यवहार” किया जाता रहा है।
एससीजी ख्वाजा के लिए सौभाग्यशाली रहा है। उन्होंने 2018 में इसी मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ 171 रन बनाकर एशेज में अपना पहला शतक जड़ा था। इसके बाद 35 वर्ष की उम्र में एससीजी में ही इंग्लैंड के खिलाफ दो शतक लगाकर उन्होंने अपने करियर को नई दिशा दी। अगले दो वर्षों में उनके बल्ले से सात शतक निकले।
हालांकि मौजूदा एशेज श्रृंखला उनके लिए आसान नहीं रही। पर्थ में खेले गए पहले टेस्ट में पीठ दर्द के कारण वह पारी की शुरुआत नहीं कर सके। इसके बाद चोट के चलते ब्रिस्बेन टेस्ट से बाहर रहने पर टीम में उनके स्थान को लेकर सवाल उठे। एडिलेड में तीसरे टेस्ट में उन्हें पहले बाहर रखा गया, लेकिन स्टीव स्मिथ के अस्वस्थ होने पर उन्हें मौका मिला। एडिलेड की पहली पारी में 82 रन बनाकर उन्होंने मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट के लिए अपनी जगह पक्की कर ली। ऑस्ट्रेलिया ने श्रृंखला में 3-1 की बढ़त के साथ एशेज पहले ही बरकरार रखी है।
उस्मान ख्वाजा ने मीडिया में हुई आलोचनाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा, “मेरे साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वो अलग था। पीठ दर्द मेरे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन मीडिया और पूर्व खिलाड़ी मुझ पर टूट पड़े। मुझे कई दिनों तक आलोचना झेलनी पड़ी। मेरे बारे में ऐसी नस्लीय धारणाएं बनाई गईं कि मैं आलसी हूं, पाकिस्तानी हूं, अश्वेत खिलाड़ियों की तरह स्वार्थी हूं, टीम की परवाह नहीं करता और कड़ी मेहनत नहीं करता। ये बातें हैं जिनसे मैं पूरी जिंदगी जूझता रहा हूं।”
यह भी पढ़ें: विराट से धोनी-बुमराह तक, टीम इंडिया ने ऐसे किया नए साल का स्वागत, देखें तस्वीरें
पर्थ टेस्ट से पहले ख्वाजा की आलोचना इसलिए भी हुई थी क्योंकि उन्होंने दो बार गोल्फ खेला और वैकल्पिक अभ्यास सत्र में हिस्सा नहीं लिया। कुछ लोगों ने गोल्फ को उनकी पीठ की समस्या से जोड़ दिया। इस पर ख्वाजा ने कहा, “मैं ऐसे कई उदाहरण दे सकता हूं जब खिलाड़ी गोल्फ खेलकर चोटिल हुए और उन पर कुछ नहीं कहा गया। ऐसे भी उदाहरण हैं जब खिलाड़ी मैच से पहले रात में खूब बियर पीकर अस्वस्थ हुए, तब भी सवाल नहीं उठे। लेकिन जब मैं चोटिल हुआ तो मेरी प्रतिबद्धता और मेरी छवि पर सवाल खड़े कर दिए गए।”
संन्यास को लेकर उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस श्रृंखला के शुरू होने से पहले ही मुझे अंदाजा हो गया था कि यह मेरी अंतिम श्रृंखला होगी। मुझे खुशी है कि मैं अपनी शर्तों पर विदाई ले रहा हूं।”
अपने टेस्ट करियर में ख्वाजा ने 87 मैचों में 43.49 के औसत से 6,206 रन बनाए हैं, जिसमें 16 शतक और 28 अर्धशतक शामिल हैं। उन्होंने कहा, “मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे ऑस्ट्रेलिया के लिए इतने मैच खेलने का मौका मिला। उम्मीद है कि मैंने लोगों को प्रेरित किया होगा।”
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टॉड ग्रीनबर्ग ने ख्वाजा के योगदान की सराहना करते हुए कहा, “उस्मान ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में बहुत बड़ा योगदान दिया है। वह हमारे सबसे भरोसेमंद सलामी बल्लेबाजों में से एक रहे हैं। उनकी सफलता का प्रमाण यह है कि 2023 में, जब ऑस्ट्रेलिया ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप जीती, उसी सत्र में उन्हें आईसीसी टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया।”






