फारुख इंजीनियर को मैनचेस्टर में मिला सम्मान, मुंबई क्रिकेट संघ पर जताई नाराजगी
Farokh Engineer Stand in Manchester: फारुख इंजीनियर और क्लाइव लॉयड के नाम पर मैनचेस्टर में एक स्टैंड का नामकरण किया गया। यह भारतीय खिलाड़ी के बहुत बड़ा सम्मान है।
- Written By: उज्जवल सिन्हा
फारुख इंजीनियर-क्लाइव लॉयड के साथ (फोटो-सोशल मीडिया)
Farokh Engineer Stand in Manchester: भारत और इंग्लैंड के बीच चौथे टेस्ट मुकाबले से पहले भारत के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर को एक बड़ा सम्मान मिला। मैनचेस्टर में उनके नाम पर एक स्टैंड का नामकरण किया गया। फारुख इंजीनियर भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी बने, जिनका विदेशी मैदान में स्टैंड बनाया गया। वहीं इसके साथ वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज क्लाइव लॉयड के नाम पर भी एक स्टैंड का नामकरण हुआ।
ओल्ड ट्रैफर्ड में खिलाड़ियों और मीडिया सेंटर के बीच तथा हिल्टन होटल के विस्तार पर स्थित ‘बी स्टैंड’ को भारत और इंग्लैंड के बीच चौथे टेस्ट के पहले दिन औपचारिक रूप से सर क्लाइव लॉयड और फारुख इंजीनियर स्टैंड कर दिया गया। लंकाशायर क्रिकेट क्लब में उनके अपार योगदान के सम्मान में स्टैंड के अनावरण के समय इंजीनियर और वेस्टइंडीज के दिग्गज कप्तान लॉयड दोनों मौजूद थे।
फारुख इंजीनियर ने पीटीआई को बताया कि यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि भारत के लिए भी गर्व का क्षण है। क्लाइव और मैं दोनों सुबह इसके बारे में बात कर रहे थे। हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे सम्मान में ऐसा कुछ किया जाएगा। ईश्वर महान है। अपने देश में पहचान नहीं मिलने की कमी पूरी हुई।
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मुंबई क्रिकेट संघ पर जताई नाराजगी
इंजीनियर (87 वर्ष) ने अपना अधिकांश क्रिकेट मुंबई में विशेषकर ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि मेरी उपलब्धियों को वहां सम्मान नहीं मिला जहां मैंने अपना अधिकांश क्रिकेट खेला है। हालांकि इंजीनियर ने 2024 में उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार प्रदान करने के लिए बीसीसीआई का आभार व्यक्त किया था।
लंकाशायर क्रिकेट ने एक बयान में कहा, ‘‘लंकाशायर क्रिकेट को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि क्लब ने एमिरेट्स ओल्ड ट्रैफर्ड में एक स्टैंड का नाम क्लब के दिग्गजों और ‘हॉल ऑफ फेम’ में शामिल सर क्लाइव लॉयड और फारुख इंजीनियर के नाम पर रखा है। यह समारोह आज सुबह इंग्लैंड और भारत के बीच चौथे टेस्ट के पहले दिन हुआ जिसमें सर क्लाइव और फारुख के साथ क्लब के प्रतिनिधि पट्टिका का अनावरण करने के लिए शामिल हुए।”
क्लाइव लॉयड का ऐसा रहा है लंकाशायर के साथ रिकॉर्ड
वेस्टइंडीज के साथ दो बार विश्व कप विजेता कप्तान रहे लॉयड ने 1968 और 1986 के बीच लंकाशर के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 219 मैच खेले। उन्होंने 12,764 रन बनाए और 55 विकेट लिए। क्लब के लिए लिस्ट ए क्रिकेट में लॉयड ने 8,522 रन और 60 विकेट लिए। उन्होंने लंकाशायर की एक दिवसीय सफलताओं में बड़ा योगदान देते हुए 1969 और 1970 में दो एक दिवसीय लीग खिताब जीते। उन्होंने 1970 और 1975 के बीच चार जिलेट कप जीते जिसमें 1972 के लॉर्ड्स में वॉरविकशर के खिलाफ 126 रन की यादगार पारी शामिल है।
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भारत के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इंजीनियर लंकाशर के विकेटकीपर थे जिन्होंने 1968 से 1976 तक क्लब का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने क्लब के लिए 175 मैच खेले जिनमें 5,942 रन बनाने के साथ 429 कैच लिए और 35 स्टंपिंग की। इंजीनियर के बल्ले से शानदार प्रदर्शन और स्टंप के पीछे उनके अद्भुत कौशल ने लंकाशर में एक स्वर्णिम युग की शुरुआत की जो 1970 के दशक में एकदिवसीय मैचों का बादशाह था। जब लॉयड और इंजीनियर ने लंकाशायर के लिए पदार्पण किया तब क्लब ने 1950 के बाद से कोई बड़ा खिताब नहीं जीता था, लेकिन आठ साल बाद 1970, 1971, 1972 और 1975 में चार बार जिलेट कप और 1969 और 1970 में दो बार जॉन प्लेयर लीग खिताब जीते। (भाषा इनपुट के साथ)
