मैनचेस्टर में फारुख इंजीनियर और क्लाइव लॉयड के नाम स्टैंड, लंकाशायर ने की घोषणा

Farokh Engineer and Clive Lloyd: फारुख इंजीनियर और क्लाइव लॉयड के नाम से मैनचेस्टर में स्टैंड बन रहा है। चौथे टेस्ट मैच से पहले स्टैंड का नामकरण समारोह होगा। इस दौरान इंजीनियर वहां मौजूद रहेंगे।
मैनचेस्टर में फारुख इंजीनियर और क्लाइव लॉयड के नाम स्टैंड, लंकाशायर ने की घोषणा
फारुख इंजीनियर और क्लाइव (फोटो-सोशल मीडिया)
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Farokh Engineer and Clive Lloyd: भारत और इंग्लैंड के बीच चौथा टेस्ट मुकाबला मैनचेस्टर में खेला जाएगा। इस मुकाबले के दौरान भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज फारुख इंजीनियर के नाम का स्टैंड मैनचेस्टर के दर्शक दीर्धा में लगाया जाएगा। वहीं मैनचेस्टर में वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी क्लाइव लॉयड के नाम पर भी एक स्टैंड बनाया जाएगा।

फारुख इंजीनियर और क्लाइव लॉयड की पूर्व काउंटी टीम लंकाशायर ने इन दोनों दिग्गजों के नाम पर स्टैंड का नाम रखने का फैसला किया है। इंजीनियर लगभग एक दशक तक लंकाशायर की ओर से खेले जबकि वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान लॉयर्ड लगभग दो दशक तक क्लब के साथ रहे और क्लब के इतिहास में बहुमूल्य योगदान दिया।

लंकाशायर के लिए खेलते हुए इंजीनियर का रिकॉर्ड

सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि स्टेडियम के नामकरण का समारोह 23 जुलाई के शुरू हो रहे टेस्ट मैच के पहले दिन होगा। यह क्लब के दोनों दिग्गजों के लिए उचित सम्मान है। वर्ष 1968 से 1976 के बीच 87 वर्षीय इंजीनियर ने 175 मैचों में लंकाशायर के लिए 5942 रन बनाए, 429 कैच लिए और 35 स्टंपिंग की। दूसरी ओर दो बार विश्व कप जीतने वाली वेस्टइंडीज की टीम के कप्तान लॉयड ने 1970 के दशक की शुरुआत में एक विदेशी खिलाड़ी के रूप में आने के बाद क्लब की किस्मत बदल दी।

1970 से 75 तक लंकाशायर ने चार बार जिलेट कप जीता था

मुंबई में जन्मे इंजीनियर ने लंकाशायर के लिए पदार्पण किया तो क्लब ने 15 साल से अधिक समय तक कोई बड़ा खिताब नहीं जीता था लेकिन उन्होंने 1970 से 1975 के बीच चार बार जिलेट कप जीतने में टीम की मदद की। वहीं इंजीनियर ने अपना अधिकतर समय मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेला लेकिन वहां उनके नाम पर कोई स्टैंड नहीं है।

इंजीनियर ने कुछ साल पहले क्लब की वेबसाइट से कहा था कि वह अविश्वसनीय समय था और ओल्ड ट्रैफर्ड एक शानदार जगह थी। लोग हमें खेलते देखने के लिए मीलों दूर से आते थे। ओल्ड ट्रैफर्ड के ड्रेसिंग रूम से हम वारविक रोड रेलवे स्टेशन देख सकते थे और मैच से पहले हम खचाखच भरी ट्रेनों को प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को उतारते हुए देखते थे। हम नारे लगाते, बातें करते और हंसी-मजाक करते लोगों को सुन सकते थे।

लंदन में रहते हैं फारुख इंजीनियर

संन्यास लेने के बाद इंजीनियर ने मैनचेस्टर को अपना घर बना लिया और आज तक यहीं रहते हैं। यहां निजी दौरे पर आए पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर के भी क्लब के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समारोह में शामिल होने की उम्मीद है। (भाषा इनपुट के साथ)

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