

10वें जन्मदिन पर अर्शी गुप्ता ने 2026 की मिनी मैक्स श्रेणी का खिताब जीता।
45 डिग्री की गर्मी और -1 डिग्री की ठंड में भी किया अभ्यास।
भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए फॉर्मूला-1 तक पहुंचना है सपना।
Arshi Gupta Story: फरीदाबाद की 10 वर्षीय कार्टिंग रेसर अर्शी गुप्ता ने मोटरस्पोर्ट की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अपने 10वें जन्मदिन पर उन्होंने एफएमएससीआई आरएमसी इंडियन नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप 2026 की मिनी मैक्स श्रेणी का खिताब जीता। इसके साथ ही वह रोटैक्स मैक्स चैलेंज मिनी का खिताब जीतने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की ड्राइवर बनीं।
अर्शी ने लगातार दूसरे साल राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ी सफलता जोड़ ली है। उनका लक्ष्य अब अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट में भारत का प्रतिनिधित्व करना और फॉर्मूला-1 रेसिंग तक पहुंचना है।
अर्शी गुप्ता का फॉर्मूला-1 रेसिंग के प्रति लगाव बेहद कम उम्र में शुरू हो गया था। महज 6 साल की उम्र में वह पहली बार अपने माता-पिता के साथ फॉर्मूला-1 ट्रैक पर गई थीं। इसके बाद उन्होंने कार्टिंग की प्रैक्टिस शुरू की और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। 10 साल की उम्र तक वह कई खिताब अपने नाम कर चुकी हैं।
अर्शी ने वर्ष 2025 में माइक्रो मैक्स श्रेणी का खिताब जीता था। इसके बाद 2026 में मिनी मैक्स श्रेणी में चैंपियन बनकर उन्होंने लगातार दो वर्षों में रोटैक्स मैक्स चैलेंज की दो अलग-अलग श्रेणियों में खिताब जीतने की उपलब्धि हासिल की।
राष्ट्रीय कार्टिंग चैंपियनशिप के पांचवें राउंड की अंतिम रेस में अर्शी ने लगातार आठ सबसे तेज लैप पूरे किए और ट्रैक रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। कार्टिंग में लड़के और लड़कियां एक ही ट्रैक पर प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में अर्शी की उपलब्धि उनकी मेहनत और रेसिंग कौशल को दर्शाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अर्शी को फॉर्मूला-1 अकादमी के लिए चयनित होने वाली एशिया की पहली महिला के रूप में भी बताया गया है। इसके अलावा, वह एफआईए के ‘डिस्कवर योर ड्राइव’ कार्यक्रम के लिए वैश्विक स्तर पर सबसे कम उम्र में चयनित हुईं। उन्हें एफआईए अध्यक्ष पदक भी मिल चुका है। वह संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन में पोडियम पर जगह बना चुकी हैं।
अर्शी की सफलता के पीछे कठिन अभ्यास और अनुशासन की अहम भूमिका है। वर्ष 2025 में उन्होंने 137 दिन ट्रैक पर अभ्यास किया और 29 रेसों में हिस्सा लिया। वर्ष 2026 में अब तक वह 140 दिन अभ्यास कर चुकी हैं और 30 रेसों में भाग ले चुकी हैं।
उन्होंने भारत, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, श्रीलंका और फ्रांस के 21 सर्किटों पर रेसिंग और प्रशिक्षण किया है। उनके कोच के मुताबिक, अर्शी ने यूएई में 45 डिग्री तापमान और इंग्लैंड में -1 डिग्री की ठंड में भी अभ्यास किया। इतनी कम उम्र में अलग-अलग मौसम की कठिन परिस्थितियों में लगातार ट्रेनिंग करना उनके समर्पण को दिखाता है।
अर्शी के माता-पिता डॉ. दीप्ति गुप्ता और अंचित गुप्ता ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अर्शी को इस मुकाम तक पहुंचाने में मेहनत, लंबी यात्राओं और कई मुश्किलों का योगदान रहा है। उनके मुताबिक, रेसिंग अर्शी का जुनून है और उनकी उपलब्धि पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है।
भारत में उनके कोच रोहित खन्ना ने अर्शी के समर्पण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की सराहना की। वहीं, ब्रिटेन में उनके कोच डेविड बेलचम्बर्स ने कहा कि अर्शी की प्रतिभा और मेहनत उन्हें लगातार बेहतर बना रही है।
अर्शी दिल्ली पब्लिक स्कूल, फरीदाबाद में पढ़ती हैं। वह पढ़ाई और रेसिंग के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही हैं। स्कूल की प्रधानाचार्या बनिता सिंह ने कहा कि अर्शी ने साबित किया है कि उत्कृष्टता हासिल करने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है।
अर्शी का सपना भारत में कार्टिंग और फॉर्मूला-1 रेसिंग में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाना भी है। नवभारत से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत में कार्टिंग और फॉर्मूला-1 ट्रैक पर लड़कियां कम दिखाई देती हैं। वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक लड़कियां इस खेल में आएं और रेसिंग में अपना करियर बनाएं। अब अर्शी तेज कार्ट और बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर वैश्विक मोटरस्पोर्ट में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।