Iran Israel Nuclear Tension( Source: Social Media )
Iran Israel Nuclear Tension: पश्चिम एशिया में जिस तेजी से सामरिक परिदृश्य बदल रहा है, उससे इजराइल व अमेरिका की ईरान से जंग धीरे-धीरे परमाणु युद्ध की दहलीज पर आ खड़ी हुई है। जिस तरह जंग के 23वें दिन ईरान ने कई इजराइली शहरों पर क्लस्टर बमों की झड़ी लगा दी और उसके डिमोना व अराद जैसे परमाणु शोध के सबसे संवेदनशील शहरों को निशाना बनाया, उससे इजराइल के होश फाख्ता हो गए हैं।
28 फरवरी को जिस आक्रामक तरीके से इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर महज कुछ घंटों के भीतर 50 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा के बम बरसाए थे और ईरान के टॉप लीडर अयातुल्ला खामेनेई सहित 9 शीर्ष राजनेताओं और 11 से ज्यादा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पहले ही दिन मार डाला था, उससे दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश हुई थी कि ईरान के विरुद्ध अमेरिका और इजराइल चंद घंटों में ही जंग खत्म कर देंगे।
लेकिन 24वें दिन भी ईरान दोहरी ताकत से पलटवार कर रहा है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम ईरान से युद्ध विराम करने की बेसब्री से फिराक में है, तब ईरान ने साफ शब्दों में कह दिया कि अगर युद्ध विराम चाहिए तो पहले 6 शर्तें माननी होगी।
ईरान की ये शर्तें हैं भविष्य में दोबारा युद्ध नहीं होगा, इसकी गारंटी दें। मध्य पूर्व में अमेरिका के जो 38 सैन्य ठिकाने हैं, उनको बंद किया जाए, ईरान को इस युद्ध में अब तक हुए सारे नुकसान का मुआवजा देकर भरपाई की जाए, पूरे मध्य पूर्व में चल रहे सभी युद्ध खत्म किए जाएं।
होमुंज स्टेट के नए नियम बनाए जाएं, ईरान के खिलाफ मीडियाकर्मियों पर कार्रवाई की जाए, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने गरजकर कहा कि हम किसी भी हमले का न सिर्फ जवाब देंगे बल्कि अगर ईरान के परमाणु ठिकानों की निशाना बनाया गया, तो होमुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर देंगे, जिससे पूरी दुनिया तेल संकट से घिर जाएगी।
डोनाल्ड ट्रंप और उनके मुख्य सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने वास्तव में ईरान की धमकियों को गंभीरता से लिया है। ट्रंप अपने सलाहकारों के साथ इस बात पर गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं कि सीजफायर की कोई राह कैसे निकले? हालांकि उन्होंने ईरान की मुआवजा संबंधी शर्त को न केवल मानने से इनकार कर दिया है बल्कि अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह धमकी भी दी है कि अगर 48 घंटों के भीतर ईरान का होमंज स्टेट को लेकर रवैया नहीं बदलता तो उसके ऊर्जा ठिकानों पर बमबारी की झड़ी लगा दी जाएगी, अगर सचमुच ट्रंप पागलपन में उतरे तो सैन्य विशेषज्ञों को शक है कि परमाणु युद्ध भी छिड़ सकता है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने दुनिया को चेतावनी दी है कि ईरान जंग दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। जंग एक सप्ताह भी जारी रही, तो पूरी दुनिया तेल और गैस संकट में फंस जाएगी।
इस खतरनाक हो चली जंग पर दखल देना ही होगा और इसमें यूरोप के साथ बड़ी भूमिका भारत की भी हो सकती है। भारत एकमात्र ऐसी बड़ी राजनीतिक ताकत है, जिसके इस युद्ध में शामिल तीनों पक्षों के साथ अच्छे रिश्ते हैं।
ईरान भले दुनिया के दूसरे देशों को इतना महत्व न देता हो, लेकिन पिछले 72 घंटों में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने प्रधानमंत्री मोदी से न सिर्फ दो बार बात की है बल्कि साफ शब्दों में कहा है कि ब्रिक्स के अध्यक्ष होने के नाते मोदी इस युद्ध को रुकवाने में अपनी भूमिका निभाएं, महत्वपूर्ण बात ये है कि ईरान ने हिंद महासागर में स्थित ब्रितानी और अमेरिका के सैन्य ठिकाने डियागोगार्सिया तक मिसाइल हमला किया है।
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लगभग 4000 किलोमीटर दूर डियागोगार्सिया पर उसने जिस तरह बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है, उससे बात साफ हो गई है कि पूरा यूरोप उसके निशाने की जद में है। इसलिए अब भारत जैसे देश को कूटनीतिक कमर कसकर आगे आना ही होगा ताकि दुनिया युद्ध की आग में राख होने से बच सके।
लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा