Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

निशानेबाज: कार्यकर्ता भी ऊंचा पद चाहता, मन में नेता बनने की लालसा

Indian Politics: राजनीति की शतरंज पर चाल चलना है तो नेता को चालबाज बनना ही पड़ता है। करोड़ों की दौलत जुटाने पर भी खुद को सादगी पसंद जनसेवक बतानेवाले नेताओं की कमी नहीं है।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Aug 30, 2025 | 12:00 PM

नेतागिरी की क्या परिभाषा है (सौ. डिजाइन फोटो)

Follow Us
Close
Follow Us:

 

नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, हमारी इच्छा नेता बनने की है। इसके लिए कुर्ता, चूड़ीदार पैजामा और मोदी जैकेट का इंतजाम हमने कर लिया। पर्सनालिटी डेवलपमेंट और पब्लिक स्पीकिंग की क्लास भी लगा ली है।’ हमने कहा, ‘इस खटपट में क्यों पड़ते हैं? आपके पीछे परिवार की जिम्मेदारी है। नेतागिरी करने जाएंगे तो घर के रहेंगे न घाट के! कोई एकदम से नेता नहीं बनता। पहले जमीन से जुड़े सच्चे कार्यकर्ता बनकर पसीना बहाइए। एक दर्जन लोगों का ग्रुप बनाकर किसी नेता के अगल-बगल घूमिए। अपनी सोशल एक्टिविटी की खबरें अखबार में छपवाइए। इस तरह एक-एक सीढ़ी चढि़ए।

मोर्चे में शामिल होकर नारे लगाने, पोस्टर चिपकाने, धरना देने की अप्रेंटिसशिप करते रहिए। मंच पर दरी बिछाने, कुर्सी लगाने, सजावट करने की साधना करते रहित। उम्मीद रखिए कि कभी आपके मुंह में अंगूर आ टपकेगा।’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, ऐसा करते-करते 10-20 साल व्यर्थ ही गुजर जाएंगे। हमें नेतागिरी का शॉर्टकट बताइए। ऐसा रास्ता बताइए कि हींग लगे ना फिटकरी लेकिन रंग चोखा आए! क्या हम किसी नेता को अपना गॉडफादर बनाएं और आंख मूंदकर उसी के गुण गाएं?’

सम्बंधित ख़बरें

कमाई 11 करोड़ और विदेश यात्रा पर खर्च किए 60 करोड़, संबित पात्रा का सवाल, क्या है राहुल के फंडिंग का सोर्स

नागपुर में सियासत गरमाई, NCP की नई सूची से बढ़ीं चर्चाएं, प्रफुल पटेल-तटकरे पर क्यों उठे सवाल?

केरल में CM पद को लेकर गदर, वायनाड की सड़कों पर राहुल-प्रियंका के खिलाफ लगे पोस्टर, दी बड़ी चेतावनी

रंगासामी युग की शुरुआत, 5वीं बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री बने एन. रंगासामी, बीजेपी अध्यक्ष भी रहे मौजूद

हमने कहा, ‘नेतागिरी चमकाने के लिए वादे जरूरी होते हैं। मदारी भी सांप-नेवले की लड़ाई दिखाने के वादे पर मजमा जुटाता है लेकिन उसके पिटारे और झोले से ये दोनों प्राणी कभी बाहर नहीं निकलते। फिर भी उसकी बातों में उलझकर लोग पैसा बरसाते हैं। नेताओं को बड़ा मदारी समझ लीजिए। उनके वादे जुमले बनकर रह जाते हैं। नेता मीठी बातें करनेवाला महाठग होता है। कोई नहीं जान पाता कि उसके दिल में क्या है और जुबान पर क्या?’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, राजनीति की शतरंज पर चाल चलना है तो नेता को चालबाज बनना ही पड़ता है। करोड़ों की दौलत जुटाने पर भी खुद को सादगी पसंद जनसेवक बतानेवाले नेताओं की कमी नहीं है।

ये भी पढ़ें–  नवभारत विशेष के लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

बिजनेस में घाटा आ सकता है लेकिन नेतागिरी हमेशा फायदे का सौदा है। बड़े उद्योगपतियों, ठेकेदारों, इंजीनियरों को अपनी मुट्ठी में रखो। कमीशन की दौलत की बारिश में मजे से शावर बाथ लो और आजीवन पॉवर में बने रहने के हथकंडे अपनाओ। आज के जमाने में नेता की यही पहचान बन कर रह गई है। वह जनता के प्रति भक्तिभाव का दिखावा करनेवाला बगुला भगत बनकर रह गया है।’

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Worker also wants a higher position

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Aug 30, 2025 | 12:00 PM

Topics:  

  • Indian Politics
  • Maharashtra Politics
  • Special Coverage

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.