नवभारत संपादकीय: दहेज हत्याओं का कलंक कब तक? देश में महिला सुरक्षा पर सवाल
Women Safety India: देश में दहेज से जुड़ी महिलाओं की मौतों पर गंभीर चिंता जताई गई है। भोपाल और ग्रेटर नोएडा मामलों में संदिग्ध परिस्थितियों में मौतों की जांच जारी है।
- Written By: अंकिता पटेल
दहेज हत्या, महिला सुरक्षा, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Dowry Harassment Cases India: देश में प्रति वर्ष दहेज या अन्य कारणों से महिलाओं की हत्या के लगभग 6,000 मामले सामने आते हैं। सुशिक्षित तथा शहरी मध्यम वर्ग की महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। भोपाल में ट्विशा शर्मा तथा ग्रेटर नोएडा में दीपिका नागर की मौत यही दशांती है कि शिक्षित व सभ्य माने जाने वाले लोग भी दहेज की मांग को लेकर दरिंदे बन जाते हैं। इन युवतियों में से एक की शादी 5 महीने पूर्व तथा दूसरी की डेढ़ वर्ष पूर्व हुई थी। इनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई।
दहेज की मांग करने वाले ससुराल वालों ने उन पर घोर अत्याचार किए, ट्विशा शर्मा के मायके वालों का कहना है कि उसे अपमान, घरेलू हिंसा तथा जबरन गर्भपात का शिकार होना पड़ा। उस पर दबाव डाला जाता रहा कि वह अपने वित्तीय संसाधन अपने वकील पति के हवाले कर दे। नोएडा में 24 वर्षीय दीपिका नागर ने छत से कूदकर जान दे दी।
उसके ससुराल वाले उस पर बार-बार लग्जरी एसयूवी लाने का दबाव डाल रहे थे। उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आंतरिक अंगों में क्षति का पता चला। पुलिस जांच कर रही है कि उसने आत्महत्या की या उसकी हत्या कर शव को नीचे फेंक दिया गया। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेकर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।
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भोपाल में ट्विशा शर्मा प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। देश में ऐसे कितने ही मामले होते हैं जिनकी रिपोर्ट नहीं की जाती। मुश्किल से एक तिहाई मामलों में न्याय मिल पाता है। दहेज लोभियों की तादाद घटने की बजाय बढ़ती ही चली जा रही है। 2021 के सतबीर सिंह विरुद्ध हरियाणा राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या साबित करने के लिए निम्न बातों का उल्लेख किया था। जैसे कि महिला की मौत जलने से या शारीरिक चोटें लगने से हुई हो।
विवाह के बाद से 7 वयों के भीतर मौत हुई हो। मृत्यु के पहले उसके पति और ससुरालवालों ने उससे क्रूरता की हो व सताया हो और यह सब दहेज की मांग के लिए किया गया हो। दहेज हत्या समाज के लिए कलंक है जहां महिलाओं को वस्तु समइस जाता है और बेशर्मी से दहेज लाने के लिए बहू को प्रताड़ित किया जाता है। लड़की वालों से गैरजरूरी मांग करते हुए उन पर दबाव डाला जाता है।
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यद्यपि कन्या पक्ष अपनी हैसियत के मुताबिक विवाह में खर्च करता और बेटी को कुछ न कुछ जरूर देता है लेकिन फिर भी दहेज लोभी संतुष्ट नहीं होते। पुत्रवधु को अपने घर की शोभा या गृहलक्ष्मी के रूप में स्वीकार करने और बेटे-बहू का हंसता-खेलता सुखी संसार देखने की बजाय मायके से और धन संपत्ति लाने का दबाव डालते हैं और हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। कानून अपनी जगह है, लेकिन समाज में भी जागृति होनी चाहिए।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
