Navabharat Nishanebaaz: पेट्रोल रहित विमानों की उड़ान, वैज्ञानिक दें इस ओर ध्यान
Jet Fuel Cost: विमान ईंधन ATF की बढ़ती कीमतों से एयरलाइंस ने उड़ानों में कटौती की है। चर्चा में यह सवाल भी उठा कि अंतरिक्ष मिशनों में ईंधन की कमी का असर क्यों नहीं दिखता।
- Written By: अंकिता पटेल
नवभारत डिजाइन फोटो
India Airline Fuel Crisis: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, विमानों का ईंधन एवर टबॉइन फ्यूल या एटीएफ कहलाता है। यह पेट्रोल का शुद्ध और अति ज्वलनशील रूप होता है। आप विमान यात्रा करते समय सोच भी नहीं सकते कि नीचे उसकी विशाल टंकी में भीषण आग धधक रही है। ईंधन महंगा होने से एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में काफी कटौती कर दी है। ऐसे में क्या होगा?’
हमने कहा, ‘आप पुरानी हिंदी फिल्मों के कुछ गीत सुनिए और आंख मूंदकर कल्पना कीजिए कि विमान में सवार हैं। एक गीत है- उड़न खटोले पे उड़ जाऊं, मैं तेरे हाथ ना आऊं! एक अन्य गाना है मेरा पैगाम ले जा, दिल का सलाम ले जा, उल्फत का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही!
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जब हमने चंद्रयान और मंगलयान भेजे, अंतरिक्ष में उपाह भेजे तो क्या ईंधन नहीं लगा होगा ? तब तो सरकार ने इसरो के सामने ईंधन की कमी का रोना नहीं रोया।’
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हमने कहा, ‘वह एक अलग तकनीक है। उसमें परंपरागत पेट्रोल, डीजल का उपयोग नहीं होता। स्पेस साइंस पढ़ेंगे तो जानकारी मिलेगी। पढ़ने की फुरसत नहीं है तो अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से पूछिए!
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जब फॉसिल फ्यूल या क्रूड ऑयल नहीं खोजा गया था तब किसी ने सोचा नहीं होगा कि हवाई जहाज का ईजाद होगा और लोग एयर ट्रैवल करेंगे।’
हमने कहा, ‘ऐसा नहीं है। प्राचीन भारत में भी हवाई यात्रा हुआ करती थी। धन के देवता कुबेर के पास पुष्पक विमान था जिसे उसके सौतेले भाई रावण ने छीन लिया था। कुबेर की अलकापुरी से वह विमान लंका लाया गया। रावण लंका से कैलाश पर्वत तक शिवजी का दर्शन करने उसी विमान से जाता था। रावण के मरने के बाद राम, सीता, लक्ष्मण को अयोध्या लौटना था तो विभीषण ने पुष्पक विमान उपलब्ध कराया। वह आज के बोइंग 787 या मालवाही सी-130 हर्कुलिस विमान से भी बहुत विशाल था। उसमें हनुमान, अंगद, विभीषण और पूरी वानर सेना सवार हो गई थी। मन की शक्ति से चलने वाले पुष्पक विमान में कितने भी यात्री बैठ जाएं, एक सीट खाली बचती थी। यह लंका से अयोध्या तक की सीधी नॉनस्टाप फ्लाइट थी। इसी तरह राम-रावण युद्ध में देवता विमानों से पुष्पवर्षा करते थे। जब श्रीकृष्ण पांडवों से मिलने हस्तिनापुर गए थे तब द्वारकापुरी पर मौका पाकर शाल्व ने हवाई हमला कर दिया था। इससे भारी तबाही हुई थी। श्रीकृष्ण ने लौटने के बाद शाल्व का संहार कर दिया था।
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लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
