

बंगाल के दो विधानसभा उपचुनावों में बीजेपी की जीत, मुस्लिम बहुल रेजीनगर सीट पर भी पार्टी ने दर्ज की सफलता।
नंदीग्राम में हंसिनी रथ ने 1.22 लाख वोटों से जीत हासिल की, सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक पकड़ की चर्चा।
रेजीनगर में बीजेपी उम्मीदवार शंखरावह सरकार की जीत को राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा गया।
टीएमसी की आंतरिक कलह और विपक्षी दलों के बीच मतभेदों को चुनावी नुकसान की वजह बताया गया।
BJP Wins Muslim Majority Seat: गाल विधानसभा के 2 उपचुनावों में बीजेपी की जीत ने दिखा दिया कि अब मुस्लिम बहुल आबादी के इलाकों में भी उसे सफलता मिलने लगी है। विधानसभा में टीएमसी को हराने के बाद बीजेपी ने बंगाल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर ली है। नंदीग्राम सीट पर अपनी जीत कायम रखते हुए पार्टी में मुस्लिम जनसंख्या वाली रेजीनगर सीट भी जीत ली। इसे मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी की लोकप्रियता का प्रमाण माना जा रहा है।
अल्पसंख्यक समुदाय ने भी समझ लिया कि अब बदली हुई स्थितियों में उसे टकराव की बजाय सामंजस्य के मार्ग पर चलना पड़ेगा। 2 माह पूर्व बिहार की बांकीपुर सीट पर करारी पराजय के साथ बीजेपी को अपनी कमजोरियों का एहसास हो गया था। बांकीपुर में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने वह सीट जीती जो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने खाली की थी। इस सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता था।
इस हार के बाद बंगाल के उपचुनावों में बीजेपी ने पूरी सावधानी बरती। तभी नंदीग्राम व रेजीनगर में अपनी कुशल चुनाव मशीनरी को काम से लगा दिया। यह उपचुनाव उसके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गए थे। नंदीग्राम में बीजेपी के लिए ज्यादा चुनौती नहीं थी।
वहां मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी ने यह सीट अपने सहायक की हत्या के बाद उसकी मां हंसिनी रथ के लिए छोड़ी थी। वह सहानुभूति लहर का लाभ पाकर 1 लाख 22 हजार वोट से जीत गईं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता मिलिन प्रधान को हटाया। कभी इसी नंदीग्राम पर ममता बनर्जी का वर्चस्व था। बीजेपी के लिए रेजीनगर की सीट जीतना उल्लेखनीय है।
3 माह पहले इस सीट से आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के नेता हुमायूं कबीर 58,876 वोटों से जीते थे। इस चुनाव क्षेत्र के अधिकांश बूथ पर शत-प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। इतने पर भी बीजेपी उम्मीदवार शंखरावह सरकार 75,816 वोटों से विजयी हुए। वहां के जनमानस में स्पष्ट परिवर्तन देखा गया।
लोगों को विश्वास हो गया कि बीजेपी ही विकास कर सकती है। इस तरह बंगाल में परंपरागत रूप से जो मुस्लिम टीएमसी के लिए मतदान करते थे, वह अब बीजेपी को वोट देने लगे। उपचुनावों ने यह भी दिखा दिया कि लोकप्रियता के मामले में टीएमसी काफी नीचे चली गई है। उसे अपनी फूट की वजह से भी नुकसान उठाना पड रहा है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के उम्मीदवार ने नाम वापस लेकर कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दे दिया था। ऐसी हालत में बंगाल में ममता का फिर राजनीतिक वर्चस्व स्थापित कर पाना मुश्किल हो गया है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा